दावोस में ईरान की 'नो एंट्री', प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद खींची रेड लाइन, विदेश मंत्री का न्योता रद्द

Iran Protest: ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और कार्रवाई के कारण WFE ने ईरान के विदेश मंत्री का निमंत्रण रद्द कर दिया है। हजारों मौतों और मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच दावोस ने यह रुख अपनाया है।
Iran banned from Davos, red line drawn after crackdown on protesters, foreign minister's invitation revoked.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Foreign Minister Davos Disinvited:  ईरान में हफ्तों से जारी हिंसक प्रदर्शनों और सरकार की सख्त जवाबी कार्रवाई का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखने लगा है। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का निमंत्रण अचानक रद्द कर दिया है। यह कदम ईरान में हजारों लोगों की मौतों और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरों के बीच उठाया गया है।

मानवाधिकारों के मुद्दे पर दावोस का कड़ा फैसला

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सूत्रों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री को इस वैश्विक मंच से बाहर रखने का फैसला वर्तमान परिस्थितियों में कठिन नहीं था। ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई 'क्रूर कार्रवाई' की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इन झड़पों में हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है जिसके चलते दावोस ने ईरान के नेताओं को मंच देना सही नहीं माना।

आर्थिक मंच से बढ़कर अब 'नैतिक मंच' की ओर

WEF इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच अब केवल आर्थिक और कूटनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब वैश्विक मंचों पर किसी देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिति और मानवाधिकारों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह फैसला वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ा संकेत है कि आंतरिक दमन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

ईरान और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

ईरानी प्रशासन ने दावोस द्वारा न्योता रद्द किए जाने की इस कार्रवाई को 'राजनीतिक दबाव' का नतीजा बताया है। वहीं दूसरी ओर, विदेशों में सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की हिंसा पर यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक उचित और जरूरी कार्रवाई है।

ईरान में गहराता संकट

ईरान में दिसंबर के अंत से ही शासन विरोधी प्रदर्शनों ने जोर पकड़ रखा है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई ने मानवीय संकट पैदा कर दिया है। उधर, कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद ईरान पर दबाव और बढ़ सकता है जिससे वहां की सत्ता के लिए भविष्य की राह और मुश्किल हो सकती है।

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