ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Warns US Over Blockade Iranian Ports: ईरान (Iran) के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों और ईरानी बंदरगाहों की कथित नाकेबंदी को लेकर कड़ा बयान दिया है। अराघची ने बुधवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ फोन पर बातचीत में कहा कि अमेरिका के “उकसाने वाले कदमों” के गंभीर और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।
अब्बास अराघची ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी में अमेरिकी हस्तक्षेप पहले से नाजुक स्थिति को और बिगाड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के प्रस्तावित कदमों को क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा बताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर पेश किए गए अमेरिकी प्रस्ताव की आलोचना करते हुए उसे एकतरफा और अव्यवहारिक करार दिया।
ईरान (Iran) ने इस दौरान सुरक्षा परिषद में अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने पर चीन और रूस का आभार भी जताया। अराघची ने कहा कि दोनों देशों के समर्थन ने स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोका है। जवाब में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के “संयम और आत्मविश्वास” की सराहना की और कहा कि चीन बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन करता है।
इसी बीच जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से भी अराघची की बातचीत हुई, जिसमें समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर तनाव के प्रभावों पर चर्चा की गई। जापान ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सहयोग की इच्छा जताई।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है और ऑपरेशन शुरू होने के 36 घंटों के भीतर ईरान के समुद्री व्यापार को काफी हद तक बाधित कर दिया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए नए दौर की तैयारी चल रही है, जिसमें पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
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वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं भी पड़ सकती, क्योंकि आने वाली वार्ता में सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर आगामी बातचीत और क्षेत्रीय स्थिति पर टिकी हुई है।