

Iran Economy Crisis News In Hindi: ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान से निकलकर देश के ग्रामीण प्रांतों तक फैल गए हैं। गुरुवार को सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इन घटनाओं के बाद आशंका जताई जा रही है कि ईरान की धार्मिक सरकार प्रदर्शनों को दबाने के लिए और सख्त कदम उठा सकती है।
हालांकि तेहरान में विरोध प्रदर्शनों कुछ कम होती दिखी है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों, खासकर ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को एक और गुरुवार को दो लोगों की मौत उन शहरों में हुई, जहां ईरान के लूर जातीय समूह की आबादी अधिक है।
ये प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 वर्षीय महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक आंदोलन हुआ था। हालांकि मौजूदा विरोध प्रदर्शन अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं लेकिन इनमें भी सरकार विरोधी नारों और असंतोष की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि महसा अमिनी को कथित तौर पर सही ढंग से हिजाब न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर से सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर जमा देखा जा सकता है जबकि पृष्ठभूमि में गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। यह इलाका तेहरान से करीब 470 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि गुरुवार के प्रदर्शनों के दौरान दो लोगों की मौत हुई है।
वहीं, वाशिंगटन स्थित अब्दोर्रहमान बोरौमंद सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने भी दो प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि की है। संगठन ने एक तस्वीर भी साझा की है जिसमें एक ईरानी पुलिस अधिकारी दंगा-रोधी कवच पहने और हथियार के साथ नजर आ रहा है।
इसके अलावा, बुधवार की रात को भी प्रदर्शन के दौरान 21 वर्षीय युवक की मौत की खबर भी सामने आई है जो कथित तौर पर अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के बासिज बल से जुड़ा था। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने गार्ड सदस्य की मौत की पुष्टि की जबकि स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क ने इसके लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया। लोरेस्टान प्रांत के उप राज्यपाल सईद पौराली के अनुसार, बासिज के 13 अन्य सदस्य और कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक प्रतिबंधों से त्रस्त आम जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। गौरतलब है कि जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद से देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति और दबाव में है। ऐसे में ये विरोध प्रदर्शन ईरान के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं।