हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव, कॉन्सेप्ट फोटो
Iran US War News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग और सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार (10 मार्च, 2026) को जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध के लगभग समाप्त होने की घोषणा की, वहीं ईरान ने कड़े तेवर दिखाते हुए अमेरिकी नौसेना को सीधे तौर पर ललकारा है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता मेजर जनरल अली मोहम्मद नैनी ने एक सनसनीखेज बयान में कहा कि ईरानी सशस्त्र बल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े और विशेष रूप से विमान वाहक पोत ‘जेराल्ड फोर्ड’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नैनी ने दावा किया कि ट्रंप के दावों के विपरीत, अमेरिकी जहाज, लड़ाकू विमान और पोत ईरान की शक्तिशाली मिसाइलों और घातक ड्रोनों के खौफ से क्षेत्र से भाग गए हैं। ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिकी सेना वर्तमान में ईरान की सीमा से एक हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी पर तैनात है,।
ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग माने जाने वाले तेल मार्ग को लेकर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दी है। मेजर जनरल नैनी ने स्पष्ट कहा कि यदि अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे, तो ईरान इस पूरे क्षेत्र से एक लीटर तेल का निर्यात भी नहीं होने देगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान न केवल हॉर्मुज, बल्कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी बंद करने की योजना बना रहा है, जिससे दुनिया ‘तेल की एक बूंद’ के लिए तरस जाएगी।
दूसरी ओर, फ्लोरिडा के डोराल में मीडिया को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के 5,000 ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने निर्धारित समय से काफी आगे चल रहा है और यह ‘बुराई को खत्म करने’ की एक छोटी यात्रा थी, जो अब अंतिम जीत की ओर है। उन्होंने संकल्प जताया कि वे इस लंबे समय से चले आ रहे खतरे को हमेशा के लिए समाप्त कर देंगे।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस समय मिडिल ईस्ट में दो विमान वाहक स्ट्राइक समूह तैनात हैं USA अब्राहम लिंकन अरब सागर में और USA जेराल्ड आर फोर्ड लाल सागर में मौजूद है। जहां ट्रंप प्रशासन इसे अपनी जीत बताकर युद्ध समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, वहीं ईरान का रुख संकेत दे रहा है कि वह किसी भी समझौते या समर्पण के मूड में नहीं है और युद्ध को खत्म करने का समय अब वह खुद तय करेगा।