अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर कब्जा करेगा (सोर्स- सोशल मीडिया)
America Will Capture Iran Nuclear Sites: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्षों द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान में अब तक 1300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित “सीक्रेट योजना” ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है।
खबरों के अनुसार, अमेरिका अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर जमीन से भी कब्जे की तैयारी कर रहा है। अगर अमेरिका ऐसा करता है और जमीनी हमले की शुरुआत करता है तो युद्ध और गंभीर स्थिती में चला जाएगा।
युद्ध के नौवें दिन भी आसमान से मौत बरस रही है। इजरायली सेना ने ईरान के इस्फहान एयरपोर्ट को निशाना बनाकर हमला किया। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार इस हमले में ईरान का एक F-16 लड़ाकू विमान नष्ट हो गया। राजधानी तेहरान भी हमलों की गूंज से नहीं बच सकी। ईरानी मीडिया के अनुसार तेहरान के निलोफर स्क्वायर में हुए बमबारी में लगभग 20 लोग मारे गए। इसके अलावा तेल डिपो और अन्य संवेदनशील स्थलों में आग लग गई। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक ईरान में कुल 1,332 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि घायलों की संख्या लाखों में है।
संघर्ष अब खाड़ी देशों तक फैल गया है। ईरान ने उन देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत में अमेरिकी ‘अरिफजान बेस’ पर सटीक मिसाइलें दागी हैं। दुबई और बहरीन में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। दुबई के मशहूर मरीना टावर की ओर भी एक मिसाइल आई, जिसे सुरक्षा बलों ने हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबे से नीचे काफी नुकसान हुआ। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसने अपने क्षेत्र में 100 से अधिक हमलों को नाकाम किया।
मध्य पूर्व में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले फिर से तेज कर दिए हैं और ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध के अगले चरण में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले कदम उठाने की चेतावनी दी है। वहीं ईरान भी खाड़ी देशों और इजरायल की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,200 से अधिक और लेबनान में 290 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
अमेरिका का अगला कदम सबसे अधिक चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस में यह मंथन चल रहा है कि क्या अमेरिकी सेना को ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीधे हमला करना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अपने लक्ष्यों को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हवाई हमलों और समुद्री घेराबंदी से अमेरिका और इजरायल को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। इस कारण से अमेरिकी स्पेशल फोर्स को ईरान की जमीन पर भेजने की तैयारी की जा रही है। यह कदम बेहद जोखिम भरा है क्योंकि इसके वैश्विक प्रभाव गंभीर होंगे।
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ईरान ने भी कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अगर अमेरिका ने सेना जमीन पर उतारी, तो उनका मुकाबला आत्मघाती साबित होगा। पेजेश्कियान ने हाल ही में बयान में यह भी कहा कि दुश्मनों ने उनके बयानों को गलत पेश किया है। उनका कहना है कि ईरान पड़ोसियों के साथ भाईचारे का रिश्ता चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हमले का जवाब देना भी मजबूरी है।