Iran में सत्ता का भारी संघर्ष, होर्मुज में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग से दुनियाभर में गहराया संकट
Hormuz Ship Firing: होर्मुज में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद यह सवाल उठ रहा है कि Iran की सत्ता असल में किसके पास है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना का कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
- Written By: प्रिया सिंह
होर्मुज जलडमरूमध्य फायरिंग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Strait Of Hormuz Conflict: शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे 2 भारतीय जहाजों पर अचानक फायरिंग की भयानक घटना सामने आई है। इस गंभीर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में पहले से चल रही महाजंग की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक बन गई है। यह घटना इस बात पर बहुत बड़ा सवाल उठाती है कि वर्तमान में Iran की असली सत्ता किसके हाथों में है। इस बीच नई दिल्ली ने ईरान के राजदूत को तलब करके अपनी कड़ी नाराजगी और बहुत सख्त विरोध दर्ज कराया है।
Iran में गहराता सत्ता संघर्ष
Iran के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद देश में बड़ा और खतरनाक सत्ता संघर्ष जारी है। राष्ट्रपति पेजेशकियन अमेरिका के साथ कूटनीति के माध्यम से विवाद सुलझाना चाहते हैं लेकिन सेना कड़ा रुख अपना रही है। देश की सरकार और शक्तिशाली आईआरजीसी के बीच इस भयंकर मतभेद ने पूरे फारस की खाड़ी में भारी अनिश्चितता बढ़ा दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का अहम महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग से पूरी दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल और गैस का बहुत बड़ा कारोबार होता है। भारत भी अपनी राष्ट्रीय जरूरत का करीब 90 फीसदी गैस का आयात इसी व्यस्त समुद्री रास्ते के माध्यम से करता है। लंदन किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर एंड्रेज क्रीग के मुताबिक इस अत्यंत महत्वपूर्ण रास्ते पर आईआरजीसी का पूरा कंट्रोल है।
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ईरानी नेताओं के बीच बड़ा मतभेद
28 फरवरी को महायुद्ध शुरू होने के बाद से ही आईआरजीसी और Iran सरकार के बीच लगातार मतभेद नजर आ रहे थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि युद्धविराम समझौते के बाद समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला है। वहीं दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि सभी जहाज केवल सेना के समन्वय के बाद ही वहां से गुजरेंगे।
आईआरजीसी की खतरनाक सैन्य कार्रवाई
जमीनी स्तर पर आईआरजीसी का बहुत भारी दबदबा है और उसने वहां व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इस शक्तिशाली सैन्य समूह ने कुछ निर्दोष जहाजों पर सीधे हमले किए हैं और समुद्र में खतरनाक बारूदी सुरंगें भी बिछा दी हैं। मार्च और अप्रैल में राष्ट्रपति ने आईआरजीसी पर कई लापरवाह और एकदम एकतरफा फैसले लेने के गंभीर आरोप भी लगाए थे।
सेना के कमांडरों का अड़ियल रवैया
राष्ट्रपति पेजेशकियन की कड़ी और सार्वजनिक आलोचना के बावजूद सीनियर कमांडर अहमद वहीदी ने अपना कठोर रुख बिल्कुल नहीं बदला है। इसके साथ ही एक और प्रमुख सैन्य कमांडर हुसैन तएब भी अपने अड़ियल और सख्त फैसलों पर पूरी तरह से कायम हैं। सरकार और सेना के बीच लगातार बढ़ती इस दूरी ने Iran के भविष्य को एक बहुत बड़े और गंभीर संकट में डाल दिया है।
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भारत और पूरी दुनिया की चिंता
भारतीय जहाजों पर हुई इस हालिया फायरिंग से यह पूरी तरह साबित हो गया है कि होर्मुज मार्ग अब बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। यह समुद्री रास्ता अब केवल तेल का मार्ग नहीं बल्कि Iran की असली सत्ता तय करने का एक अहम और बड़ा मैदान बन गया है। जब तक यह बेहद जटिल मामला पूरी तरह नहीं सुलझता तब तक फारस की खाड़ी में यह खतरनाक अनिश्चितता लगातार बनी रहेगी।
