

Strait of Hormuz Crisis: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। सीजफायर के बाद इसे लेकर पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह से खोला जाएगा, वहीं अब एक बार फिर से संघर्ष और टकराव की स्थिति बन गई है। पिछले 24 घंटों में स्थिति अचानक बदल गई, जब शनिवार को ईरान ने दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी कर दी, जिसके कारण उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
जब ईरान ने अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से खोलने की घोषणा की थी, तो दुनिया ने राहत की सांस ली थी। इस घोषणा के बाद तेल की कीमतें गिर गईं और इस क्षेत्र में फंसे व्यापारिक जहाजों को भी राहत मिली। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक ईरान के साथ 100 प्रतिशत डील नहीं हो जाती, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटे बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने घोषणा की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से ब्लॉक कर दिया गया है। ईरान ने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में आने वाले जहाजों को दुश्मन के सहयोगी के रूप में देखा जाएगा, और उनके खिलाफ हमला किया जा सकता है। इसके बाद, इसी दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया गया, और इन जहाजों पर फायरिंग भी की गई। इस घटना के बाद दिल्ली स्थित ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय ने तलब किया।
ईरान ने जहाजों पर फायरिंग के लिए अपने गनबोट्स की जिम्मेदारी बताई है। ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सीमित रहेगी। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को एक चुनौतीपूर्ण बयान जारी किया और कहा कि ईरानी नौसेना "अपने दुश्मनों को करारी शिकस्त देने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
इस बीच, दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को लेकर बना हुआ है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के एनरिच्ड यूरोनियम को अपने कब्जे में लेगा। वहीं, 21 अप्रैल को दोनों देशों के बीच सीज़फायर समाप्त होने वाला है, और ट्रंप ने संकेत दिया है कि इसे बढ़ाया नहीं जा सकता। इसके अलावा, सूत्रों के मुताबिक सोमवार को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है, जो इस स्थिति में कुछ बदलाव ला सकती है।