

Iran Amrica War: पूरी दुनिया के लिए ईरान और अमेरिका का टकराव मुश्किल पैदा कर दिया है। अवरोध के बीच एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा एक तरफ जहां तेहरान को कड़ी चेतावनी दी गई है, तो वहीं दूसरी ओर सीधी बातचीत का दरवाजा खुला रखने के संकेत भी दिया गया हैं। 5 अक्टूबर को पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ सीधी बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं। देशों के बीच युद्धविराम और बातचीत के कई प्रयास हुए, लेकिन समझौते की शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई मतभेद दूर नहीं हो सके। दोनों देश के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए कतर और अन्य देशों ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका भी सामने आई है।
अमेरिका ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा चुका है। टकराव के बाद से ही तेहरान को भी भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ईरान भी बातचीत के द्वारा हल निकालने का प्रयास कर रहा है। लेकिन तेहरान अपनी प्रमुख शर्तों पर कायम है और अमेरिकी दबाव को लेकर लगातार कड़ा रुख अपना रहा है।ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है तो ईरान जवाब देने के लिए तैयार है
ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के घटनाक्रम में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। ईरान ने इसके संचालन को कई शर्तों से जोड़ रखा है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है। इस जलमार्ग को लेकर तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। भारत के लिहाज से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ युद्ध को लेकर पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अगर बातचीत से समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य विकल्प पर लौट सकता है। दूसरी तरफ ईरान भी सैन्य तैयारी बढ़ाने की बात कर रहा है। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान दोनों देशों के बीच कूटनीति और टकराव, दोनों संभावनाओं को एक साथ सामने रखता है।