चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने अमेरिका से 12 हजार किमी दूर काशी पहुंचा जैक्सन, गंगा में किया अस्थि विसर्जन

Pind Daan Assi Ghat: अमेरिका के मिशिगन निवासी जैक्सन अपने दिवंगत चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने करीब 12 हजार किलोमीटर दूर वाराणसी पहुंचे। अस्सी घाट पर वैदिक रीति से अस्थि विसर्जन और पिंडदान किया।
American Man Travels 12,000 Km to Varanasi to Fulfill Uncle Last Wish, Perform Asthi Visarjan and Pind Daan
पिंडदान करते हुए जैक्सन(सोर्स- नवभारत लाइव)
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American Man Varanasi Asthi Visarjan: ​सनातन परंपरा में मोक्षदायिनी मानी जाने वाली काशी की महिमा और गंगा की आस्था सात समंदर पार अमेरिका तक फैली हुई है। अमेरिका के मिशिगन निवासी जैक्सन अपने दिवंगत चाचा 'नेट' की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए करीब 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर वाराणसी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर उन्होंने वैदिक रीति-रिवाज से अपने चाचा का अस्थि विसर्जन और पिंडदान का अनुष्ठान संपन्न कराया।

​सपनों में आने लगे थे चाचा

जैक्सन के अनुसार, वे बचपन से ही अपने चाचा नेट के काफी करीब रहे हैं। चाचा के निधन के बाद वे लगातार जैक्सन के सपनों में आने लगे, जिससे वे काफी व्याकुल रहने लगे थे। इसी दौरान सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से जैक्सन को काशी की धार्मिक मान्यताओं, पिंडदान और मोक्ष परंपरा के बारे में जानकारी मिली। जैक्सन ने बताया कि उनके चाचा भारतीय संस्कृति और काशी के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे और उनकी इच्छा थी कि उनकी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाए। चाचा की इसी अंतिम इच्छा और आत्मा की शांति के लिए वे दो अक्टूबर को भारत पहुंचे।

अस्थि विसर्जन करते हुए जैक्सन
अस्थि विसर्जन करते हुए जैक्सन (सोर्स- नवभारत लाइव)
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​अस्सी घाट पर हुआ वैदिक अनुष्ठान

वाराणसी पहुंचने के बाद अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय के आचार्यत्व में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संकल्प और पूजा-अर्चना के बाद जैक्सन ने अश्रुपूर्ण आंखों से अपने चाचा की अस्थियों को गंगा की पवित्र धारा में प्रवाहित किया और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। अनुष्ठान कराने वाले तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान सनातन धर्म में काशी, गंगा और पिंडदान का विशेष महत्व है। यहां न केवल देश, बल्कि विदेशों से भी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना लेकर आते हैं।

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सरहदों से परे रिश्तों का समर्पण

पितृपक्ष के दौरान इन दिनों काशी के विभिन्न गंगा घाटों और पिशाचमोचन कुंड पर तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में अमेरिका से आए जैक्सन की यह कहानी दर्शाती है कि अपनों के प्रति जिम्मेदारी, भावनाएं और आस्था किसी भौगोलिक सीमा या सरहद की मोहताज नहीं होतीं। अनुष्ठान पूरा होने के बाद जैक्सन ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें विश्वास है कि उनके चाचा की आत्मा को शांति मिल गई होगी।

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