चेनाब पर भारत के पनबिजली परियोजना से पाकिस्तान में हड़कंप...सिंधु जल समझौते की देने लगा दुहाई

India Pakistan Water Dispute: भारत ने कश्मीर में चेनाब नदी पर पनबिजली परियोजना का ऐलान किया, जिससे पाकिस्तान ने सिंधु जल समझौते के तहत भारत से जानकारी साझा न करने का आरोप लगाया।
pakistan statement on dulhasti stage 2 project
पाकिस्तान ने भारत को बातचीत की पेशकश की (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pakistan on Dulhasti Stage 2 Project: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते पर तनाव और बढ़ गया है, खासकर जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस समझौते को स्थगित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह टिप्पणी की थी कि सिंधु जल समझौते की शर्तें अब भारत के लिए स्वीकार्य नहीं हैं।

हाल ही में, भारत ने कश्मीर में चेनाब नदी पर "दुलहस्ती चरण-2" पनबिजली परियोजना का ऐलान किया, जिससे पाकिस्तान को चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन आंद्राबी ने इस परियोजना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत, सिंधु जल समझौते के तहत अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं कर सकता है।

क्या भारत ने नहीं दी थी परियोजना जानकारी?

पाकिस्तान ने कहा है कि भारत के साथ चेनाब नदी परियोजना पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। आंद्राबी के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत से जानकारी की मांग की है कि यह परियोजना किस तरह की है, और क्या यह रन ऑफ द रिवर परियोजना है या मौजूदा परियोजना में कोई बदलाव है।

आंद्राबी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत से यह जानकारी मांगी है कि चेनाब नदी पर चल रही परियोजना के बारे में उसे पहले क्यों नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत से उन परियोजनाओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है, जिन पर काम किया जा रहा है, और यह पूछा है कि यह कोई रन ऑफ द रिवर परियोजना है या किसी मौजूदा परियोजना में बदलाव है।

पाकिस्तान ने की बातचीत की पेशकश

इसी बीच पाकिस्तान के नेशनल असेंबली सचिवालय ने एक बयान जारी कर भारत से बातचीत शुरू करने की अपील की है। बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान हमेशा बातचीत, संयम और सहयोगी कदमों की तरफ जोर देता है। इसमें शांति वार्ता के लिए प्रस्ताव और पहलगाम हमले की संयुक्त जांच शामिल करने की बात कही गई है, ताकि उकसावे के बिना आक्रामक हमलों और तनाव को रोका जा सके। हालांकि भारत की ओर से इसे कोई आधिकारीक बयान सामने नहीं आया है।

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