INS सूरत (Image- Social Media)
Middle East conflict: मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब हवाई और समुद्री यातायात पर साफ दिखने लगा है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या टाल दी गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में भारतीय यात्री वहां फंसे हुए हैं। भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया है। जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना भी राहत और निकासी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
फिलहाल ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS Surat तैनात है। खबरों के अनुसार, हालात बिगड़ने पर यह युद्धपोत तुरंत निकासी अभियान में शामिल हो सकता है। यह आधुनिक पोत दुश्मन के रडार से बचते हुए ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसमें 32 मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और 16 ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलें तैनात हैं।
INS सूरत की लंबाई लगभग 163 मीटर और वजन करीब 7400 टन है। यह अधिकतम 30 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है। इसमें चार शक्तिशाली गैस टर्बाइन इंजन, आधुनिक सर्विलांस रडार, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चर लगे हैं। जरूरत पड़ने पर अदन की खाड़ी में मौजूद अन्य भारतीय युद्धपोतों को भी कम समय में इस क्षेत्र में भेजा जा सकता है।
भारतीय नौसेना ने 2017 में ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ की शुरुआत की थी। इसके तहत अहम समुद्री मार्गों पर लगातार युद्धपोत तैनात रखे जाते हैं। भारतीय पोत Strait of Hormuz, ओमान की खाड़ी, Gulf of Aden, सेशेल्स और मालदीव के आसपास, अंडमान-निकोबार क्षेत्र तथा बंगाल की खाड़ी (म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास) में मौजूद रहते हैं।
अदन की खाड़ी भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का बड़ा समुद्री व्यापार Suez Canal और रेड सी के रास्ते यहीं से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे Cape of Good Hope से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।
यह भी पढ़ें- ईरानी हमले में 650 अमेरिकी सैनिक हताहत, पीछे हटा एयरक्राफ्ट कैरियर, पश्चिम एशिया में बढ़ा भारी तनाव
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय नौसेना हाई अलर्ट पर है। ओमान और अदन की खाड़ी में तैनात युद्धपोत जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर सकते हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि संकट की घड़ी में हर भारतीय नागरिक को सुरक्षित स्वदेश लाया जाए और समुद्री व्यापार पर किसी बड़े व्यवधान को रोका जा सके।