'ऑपरेशन सागर बंधु' के जरिए श्रीलंका में बेली ब्रिज का निर्माण (सोर्स-सोशल मीडिया)
Indian Army Sri Lanka Disaster Relief 2026: श्रीलंका में आए भीषण ‘दित्वाह’ तूफान के बाद मची तबाही के बीच भारतीय सेना ने एक बार फिर पड़ोसी धर्म निभाते हुए अपनी मानवीय सहायता तेज कर दी है। ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत भारतीय सेना के इंजीनियर टास्क फोर्स श्रीलंका के दुर्गम इलाकों में सड़क संपर्क और बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। भारतीय जवानों ने जाफना और कैंडी जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बेली ब्रिज का निर्माण कर बाधित यातायात को दोबारा शुरू करने में सफलता पाई है। यह मिशन भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ यानी ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश करता है।
भारतीय सेना के इंजीनियरों ने कैंडी के केएम-21 क्षेत्र में 100 फीट लंबे बेली ब्रिज के निर्माण का चुनौतीपूर्ण कार्य शुरू कर दिया है। इस पुल के बन जाने से बी-492 हाईवे पर टूटा हुआ संपर्क दोबारा बहाल हो जाएगा, जिससे हजारों स्थानीय नागरिकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। श्रीलंकाई सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्माण स्थल का दौरा कर भारतीय सैनिकों की कार्यक्षमता और तकनीकी कौशल की जमकर सराहना की है।
किलिनोच्ची, जाफना में एक महत्वपूर्ण डबल लेन बेली ब्रिज को सफलतापूर्वक स्थापित करने के बाद भारतीय टीम अब चिलाव क्षेत्र में सक्रिय है। कोलंबो से 60 किलोमीटर उत्तर में स्थित चिलाव में श्रीलंका रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर हाइब्रिड बेली ब्रिज लॉन्च करने की तैयारियां की जा रही हैं। भारतीय इंजीनियरों का यह सहयोग श्रीलंका के परिवहन नेटवर्क को पुनः सक्रिय करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
मेजर जनरल रोहन मेडागोडा और ब्रिगेडियर सीडी विक्रमनायका ने भारतीय सैन्य दल के प्रयासों को मानवीय सहायता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में भारतीय सेना ने जिस तत्परता से राहत कार्य शुरू किए हैं, उसने दोनों देशों के संबंधों को और गहरा किया है। भारतीय सेना का यह मिशन ‘ऑपरेशन सागर बंधु‘ केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रीलंकाई नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव भी जगा रहा है।
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भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन की सफलता साझा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता और मित्रता का प्रतीक बताया है। भारत की ओर से दी जा रही यह तकनीकी और सैन्य सहायता तूफान से प्रभावित बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में मील का पत्थर साबित हो रही है। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जवानों का यह जज्बा दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसियों के सुख-दुख में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता है।