Weapon Export: रूस को पछाड़कर ग्लोबल हथियार मार्केट में छाया भारत, पुतिन की बढ़ी टेंशन
India Weapon Export: हथियार बाजार में भारत बहुत तेजी से उभर रहा है। रूसी पत्रकार वसीली गोलोवनिन के अनुसार भारत ने रक्षा निर्यात में रूस को पछाड़कर फिलीपींस और आर्मेनिया जैसे देशों में पैठ बना ली है।
- Written By: प्रिया सिंह
भारतीय हथियार ग्लोबल मार्केट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global India Weapon Export Market: हथियार बाजार में भारत एक बहुत ही मजबूत और बड़ा खिलाड़ी बनकर दुनिया के सामने उभरा है। भविष्य में कई भारतीय हथियार ग्लोबल मार्केट में रूस जैसे पुराने देशों को पीछे छोड़ने वाले हैं। रूस के पत्रकार वसीली गोलोवनिन ने कहा कि डिफेंस मार्केट में रूस को कड़ी टक्कर मिल रही है। यह बढ़ती वैश्विक भारत हथियार निर्यात बाज़ार रूस के पारंपरिक गढ़ों में भी अपना प्रभाव दिखा रही है।
साल 2025 में भारत का रक्षा निर्यात का आंकड़ा 4 अरब डॉलर के भारी स्तर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा साल 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के समय की तुलना में 56 गुना ज्यादा है। गोलोवनिन के मुताबिक साल 2020 के बाद से भारत ने पूरी तरह से नए बाजारों में अपनी पैठ बनाई है। भारत अब सिर्फ हथियार का खरीददार देश नहीं बल्कि एक प्रमुख और बड़ा निर्यातक देश बन चुका है।
फिलीपींस बना बड़ा ग्राहक
भारत के कुल हथियार निर्यात में आज फिलीपींस की हिस्सेदारी सबसे अधिक 42% तक पहुंच गई है। इस देश ने भारत से विशेष रूप से ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें भारी मात्रा में खरीदी हैं। हालांकि ब्रह्मोस मिसाइल भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाई है जिससे मॉस्को को भी काफी फायदा है।
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आर्मेनिया की नई पसंद
फिलीपींस के बाद आर्मेनिया भारत का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है जिसकी हिस्सेदारी 32% हो गई है। कुछ वर्ष पहले तक आर्मेनिया पूरी तरह से केवल रूसी हथियारों पर ही अत्यधिक निर्भर रहता था। अजरबैजान के खिलाफ युद्ध में हार के बाद आर्मेनिया ने बहुत तेजी से भारतीय हथियार खरीदने शुरू किए।
भारत के प्रमुख हथियार
आर्मेनिया ने भारत से मुख्य रूप से पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं। इसके अलावा इस देश ने भारत से एटीएजीएस हॉवित्जर (ATAGS) जैसे महत्वपूर्ण और बड़े हथियार भी खरीदे हैं। भारत के पिनाका रॉकेट ने युद्ध के दौरान अजरबैजान को काफी ज्यादा और भारी नुकसान पहुंचाया था।
रूस की घटी हिस्सेदारी
सिपरी (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक 2011 से 2020 के बीच आर्मेनिया में रूस की हिस्सेदारी 94% थी। लेकिन 2022 से 2024 के नए डेटा के अनुसार आर्मेनिया में भारत की हिस्सेदारी अब 43% हो गई है। आज भारत पूरी तरह से आर्मेनिया का सबसे बड़ा और प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश बन गया है।
वियतनाम और अन्य देश
भारत के रक्षा निर्यात बाजार में वियतनाम का स्थान तीसरा है जिसकी हिस्सेदारी करीब 11% है। इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देश भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर बात कर रहे हैं। अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने भी तेजी से भारतीय हथियार और हथियारों के पुर्जे खरीदने शुरू कर दिए हैं।
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रूस का भारत से व्यापार
हालांकि इन सब के बीच रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर देश मजबूती से बना हुआ है। भारत के कुल हथियार खरीद में आज भी रूस का भारी हिस्सा लगभग 36% से लेकर 40% तक है। फिर भी भारत क्षेत्रीय बाजारों में नए एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मॉस्को से तेजी से मुकाबला कर रहा है।
