बालेन शाह को बड़ा झटका, ब्रिटेन ने मध्यस्थता से किया इनकार, बोला- यह नेपाल-भारत का द्विपक्षीय मामला

India-Nepal Border Dispute: भारत-नेपाल सीमा विवाद पर नेपाली पीएम बालेन शाह को बड़ा झटका लगा है। मामले में ब्रिटेन ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे भारत-नेपाल का द्विपक्षीय मामला बताया।
Major Setback for Balen Shah: Britain Refuses Mediation, Stating It Is a Bilateral Matter Between Nepal and India.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह और ब्रिटिश राजदूत रॉब फेन (फोटो सोर्स- @UKinNepal)
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UK Rejects Nepal Mediation Request: भारत-नेपाल सीमा विवाद मामले में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को बड़ा झटका लगा है। भारत से सीमा विवाद को लेकर नेपाली पीएम द्वारा मध्यस्थता के आग्रह को ब्रिटिश सरकार ने ठुकरा दिया है। ब्रिटेन का कहना है कि यह भारत और नेपाल द्विपक्षीय मामला है। इसमें वह किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा। ब्रिटेन के पीछे हटने के बाद बालेन शाह भारत से सीमा विवाद को लेकर अपने ही देश में घिरते नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट में खुलासा

नेपाल की प्रमुख मीडिया द काठमांडू पोस्ट ने एक रिपोर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दिनों बालेन शाह के मुख्य सलाहकार कुमार ब्यांजंकर ने ब्रिटिश राजदूत रॉब फेन से मुलाकात की थी। इस दौरान ब्यांजंकर ने सुगौली संधि का हवाला देते हुए ब्रिटेन को भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था।

ब्रिटेन का बयान

रिपोर्ट के मुताबिक ब्यांजंकर ने ब्रिटेन से कहा कि आप उस वक्त मुख्य पक्षकार थे, इसलिए आपको इस पर बोलना चाहिए। आप पहल करेंगे तो भारत-नेपाल के बीच सीमा विवाद का समझौता हो सकता है। नेपाल के आग्रह को ब्रिटेन ने सिरे से खारिज कर दिया। ब्रिटिश राजदूत ने कहा, यह भारत-नेपाल का द्विपक्षीय मामला है। इसमें ब्रिटेन किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना चाहेगा।

बालेन शाह का बयान

पिछले दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में एक लंबा भाषण दिया। इसमें उन्होंने भारत से सीमा विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि यह मामला केवल एक पक्षीय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन कब्जा रखी है। उन्होंने इस मामले पर ब्रिटेन से मध्यस्थता की मांग की थी।

अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास

विशेषज्ञों की मानें तो नेपाली प्रधानमंत्री ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया है। नेपाल के इस कदम को भारत के खिलाफ एक रणनीतिक पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिटेन की भूमिका को लेकर शाह ने तर्क दिया कि चूंकि भारत-नेपाल की सीमाएं ब्रिटिश राज के दौरान ही तय की गई थीं, इसलिए मौजूदा समय में इस विवाद को सुलझाने में ब्रिटेन को आगे आना चाहिए और मध्यस्थ के रूप में हस्तक्षेप करना चाहिए।

क्या है विवाद?

पिछले कई सालों से भारत-नेपाल के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल ही में 29 अप्रैल को भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की घोषणा की। इसके बाद से यह फिर से सुर्खियों में आ गया। नेपाल सरकार ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया।

नेपाल ने 1816 की सुगौली संधि का हवाला देते हुए महाकाली नदी के पूर्व के पूरे इलाके को अपना हिस्सा है। वहीं, भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि लिपुलेख दर्रा, कैलाश मानसरोवर का प्राचीन मार्ग है और 1954 से ही भारत के प्रभावी नियंत्रण में है।

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