

US Military Action in Venezuela 2026: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक और सैन्य घमासान के बीच भारत सरकार ने वहां रहने वाले और यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद उपजे तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को वेनेजुएला की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी है। कराकस में हुई इस आकस्मिक सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है, जिससे वहां सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात जारी एक परामर्श में वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों को अत्यधिक सावधानी बरतने और अपनी बाहरी गतिविधियों को सीमित करने का निर्देश दिया है। वहां रह रहे लगभग 80 भारतीय मूल के लोगों को कराकस स्थित भारतीय दूतावास के निरंतर संपर्क में रहने के लिए कहा गया है। आपातकालीन स्थिति के लिए विशेष ईमेल cons.caracas@mea.gov.in और फोन नंबर +58-412-9584288 भी साझा किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना में तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच महीनों से चले आ रहे तनाव के बाद अमेरिकी सैनिकों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया है। अमेरिका ने मादुरो पर मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों से संबंधित गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद उन्हें सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया। इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला की वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए इसे खुली सैन्य आक्रामकता करार दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला का संचालन तब तक करेगा जब तक वहां एक सुरक्षित और लोकतांत्रिक सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता। ट्रंप ने यह भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल उद्योग में सक्रिय भूमिका निभाएगा ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने इस पूरे ऑपरेशन को 'न्याय की जीत' बताते हुए मादुरो को एक तानाशाह के रूप में संबोधित किया है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल भंडार है और आलोचकों का मानना है कि अमेरिका की इस कार्रवाई के पीछे तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने का बड़ा उद्देश्य छिपा हो सकता है। फिलहाल वहां की स्थिति बेहद अनिश्चित है और किसी भी औपचारिक प्रतिक्रिया के बिना भारत ने केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति और तेल बाजार की कीमतों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।