महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार! दोनों सदन में विपक्ष के नेताओं के बिना शुरू होगा विधानमंडल का बजट सत्र

Maharashtra Budget Session 2026: महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार बिना नेता प्रतिपक्ष के बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। संख्या के तकनीकी पेंच में फंसा विपक्ष अब सदन में अपनी आवाज खोता दिख रहा है।
maharashtra budget session 2026
महाराष्ट्र विधान भवन (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Assembly Rules: महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब दोनों सदन में बिना विपक्ष के नेता के ही बजट सेशन चलेगा। कहते हैं कि स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष एवं उसका नेता जरूरी है। परंतु महाराष्ट्र के दोनों सदन विधानसभा एवं विधानपरिषद में इस समय विपक्ष का नेता ही नहीं है।

2024 में हुए विधानसभा चुनाव में महायुति को जबरदस्त जीत हासिल हुई। नई विधानसभा का पहला सेशन दिसंबर 2024 में हुआ था। आम तौर पर पहले सेशन में विपक्ष के नेता का चुनाव होता है। लेकिन विपक्ष के नेता के पद पर फैसला विधानसभा स्पीकर ने यह कहते हुए पेंडिंग रखा है कि विपक्षी दलों में सबसे बड़ी पार्टी के सदस्यों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 10 प्रतिशत के बराबर नहीं है। यही स्थिति अब राज्य के उच्च सदन विधानपरिषद में भी हो गई।

शिवसेना यूबीटी के एमएलसी रहे अंबादास दानवे विधानपरिषद में विपक्ष के नेता थे। पिछले अगस्त में ही दानवे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विपक्ष के नेता का पद भी खाली हो गया।

कांग्रेस का दावा कमजोर

विधानपरिषद में विपक्ष के नेता पद से अंबादास दानवे के हटने के बाद कांग्रेस ने दावा करते हुए विधानपरिषद के सदस्य सतेज पाटिल को विपक्ष का नेता बनाने का पत्र विप के चेयरमैन प्रो. राम शिंदे को दिसंबर 2025 के शीतकालीन अधिवेशन में दिया था। उस पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

उल्लेखनीय है कि राज्य विधानपरिषद में 78 सीटें हैं उनमें से भी कई सीटें खाली हैं। इसके अलावा विधानपरिषद में भी किसी भी विपक्षी दल के पास कुल सीटों के 10 प्रतिशत सदस्य संख्या नहीं हैं। कांग्रेस की प्रज्ञा सातव ने BJP में शामिल होते हुए MLC सीट से इस्तीफा दे दिया। नतीजतन, कांग्रेस के MLC की संख्या घटकर 6 हो गई है। राजेश राठौड़ का टर्म भी अगले महीने खत्म हो रहा है। इससे कांग्रेस की संख्या और कम हो जाएगी। इसकी पूरी संभावना है कि कांग्रेस का लीडर ऑफ द अपोजिशन का दावा दस परसेंट क्राइटेरिया पूरा न करने के मुद्दे पर होल्ड पर रखा जाएगा। क्योंकि संख्या सात से कम है। इस तरह दोनों सदनों में विपक्ष के नेता पद को लेकर नियमों की अड़चन सामने आ रही है।

सीएम की गेंद सदनों के अध्यक्षों के पाले में

दोनों सदन में विपक्ष के नेता पद के दावे को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सेफ गेम खेल रहे हैं। उन्होंने पहले ही कह दिया है कि विपक्ष के नेता पद का फैसला विधानसभा और विधानपरिषद के अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है।फडणवीस ने यह भी साफ़ किया था कि सरकार को लीडर ऑफ द अपोजिशन के पद पर कोई एतराज नहीं है।

जबकि विपक्ष दलों में 20 विधायकों वाली सबसे सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना यूबीटी के विद्यायक भास्कर जाधव को विपक्ष का नेता बनाने की सिफारिश 1 साल से की जा रही है। उस समय स्पीकर राहुल नार्वेकर ने साफ किया था कि लीडर ऑफ़ द अपोज़िशन के पद से जुड़े नियमों की स्टडी की जा रही है। विधानसभा की तरह ही विधानपरिषद में भी विपक्ष के नेता पद पर इस बजट सत्र में फैसला होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। राज्य के इतिहास में पहली बार होगा जब बजट सेशन बिना विपक्ष के नेता के संपन्न होगा।

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