

India Indonesia Digital Diplomacy UPI QRIS Integration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई में होने वाली जकार्ता यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं होगी, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की 'डिजिटल कूटनीति' का एक नया इतिहास रचेगी। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी और दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश इंडोनेशिया, अब अपनी भविष्य की डिजिटल नींव भारत के 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) मॉडल पर रख रहा है।
28 करोड़ की आबादी और लगभग 5 प्रतिशत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि के साथ इंडोनेशिया भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2030 तक इसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था केवल ई-कॉमर्स में ही 194.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। रणनीतिक रूप से, इंडोनेशिया ने चीन के विनिर्माण और अमेरिका के भू-राजनीतिक संतुलन के बीच भारत को अपने 'डिजिटल पार्टनर' के रूप में चुना है। यह भारत के लिए पिछले एक दशक की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
इस साझेदारी का सबसे बड़ा प्रमाण 'इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क' (ION) है। यह भारत के 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) से प्रेरित है और Beckn 2.0 प्रोटोकॉल पर आधारित है। 7 जुलाई को होने वाले मोदी-प्रबोवो शिखर सम्मेलन के दौरान ION के पहले लाइव ट्रांजैक्शन की उम्मीद की जा रही है।
यह नेटवर्क खरीदारों, विक्रेताओं, रसद प्रदाताओं और भुगतान प्रणालियों को एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र में जोड़ देगा। वर्तमान में इंडोनेशिया में प्लेटफॉर्म कमीशन 25 से 40 प्रतिशत तक है, जिसे ION के माध्यम से घटाकर 8 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।
बता दें कि इंडोनेशिया में वर्तमान में 6.5 करोड़ सूक्ष्म और लघु उद्योग हैं, जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 25 से 40 प्रतिशत तक का भारी कमीशन देना पड़ता है। ION के जरिए इस खर्च को घटाकर 8 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य है, जिससे छोटे व्यापारियों का लोकतंत्रीकरण होगा।
भारत के UPI और इंडोनेशिया के QRIS भुगतान प्रणाली का एकीकरण इस डिजिटल कॉरिडोर का दूसरा मुख्य स्तंभ है। 2025 के अंत तक क्यूआरआईएस के पास 5.9 करोड़ उपयोगकर्ता और 4.2 करोड़ मर्चेंट थे, जो इसके मूल लक्ष्य से दोगुने से भी अधिक है। भारत और इंडोनेशिया के बीच एक लाइव यूपीआई-क्यूआरआईएस कॉरिडोर न केवल व्यापार को सुगम बनाएगा, बल्कि बाली और अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले सालाना 17 लाख भारतीय पर्यटकों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।
भारत की 'प्रोटीन ई-गव टेक्नोलॉजीज' जैसी कंपनियां इंडोनेशिया के 'डिजिटल नुसंतारा' अभियान में मदद कर रही हैं। इसमें डिजिटल पहचान, ई-केवाईसी और टैक्स आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हैं। इसके अलावा, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सहयोग से इंडोनेशिया के पूंजी बाजार को एआई-संचालित निगरानी प्रणालियों से लैस करने पर भी चर्चा चल रही है।
--सचिन वी. गोपालन, फाउंडर, इंडोनेशिया इकोनॉमिक फोरम