कनाडा में खालिस्तानियों का खेल खत्म! NSA डोभाल के दौरे और मार्क कार्नी की सख्ती से मची खलबली
Ajit Doval Canada Visit: भारत के एनएसए अजीत डोभाल के कनाडा दौरे के बाद खालिस्तानी संगठनों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। फंडिंग से लेकर नेटवर्क तक अब कनाडा सरकार कड़े कदम उठाने जा रही है।
- Written By: अमन उपाध्याय
NSA डोभाल के दौरे और मार्क कार्नी की सख्ती से खालिस्तानियों में मची खलबली, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Khalistani Funding in Canada: भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही कड़वाहट अब दोस्ती और सहयोग में बदलती नजर आ रही है। 7 फरवरी 2026 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का कनाडा दौरा इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है। इस दौरे के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी संगठनों के लिए आने वाला समय बहुत मुश्किलों भरा होने वाला है।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ेगा सीधा सहयोग
अपनी यात्रा के दौरान अजीत डोभाल ने कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एडवाइजर नथाली ड्रोइन से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण नतीजा यह रहा कि दोनों देशों ने अपने-अपने सिक्योरिटी और लॉ-एनफोर्समेंट लायजन ऑफिसर नियुक्त करने का फैसला किया है। इससे भारत और कनाडा की जांच एजेंसियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा जिससे ड्रग्स तस्करी, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और विशेष रूप से खालिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर रियल-टाइम जानकारी साझा करना आसान हो जाएगा।
पीएम मार्क कार्नी का ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’
कनाडा के वर्तमान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी वैश्विक राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते हैं। वह ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ की दिशा में सक्रिय हैं और इसी रणनीति के तहत वह मार्च 2026 में भारत का दौरा करने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कनाडा भारत के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध चाहता है तो उसे भारत की उन सुरक्षा चिंताओं को दूर करना होगा जो लंबे समय से तनाव का कारण रही हैं। इसमें सबसे प्रमुख मुद्दा कनाडा की धरती से चलने वाली अलगाववादी गतिविधियां हैं।
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फंडिंग के नेटवर्क पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक
कनाडा सरकार ने सितंबर में पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया था कि देश के भीतर से खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों को आर्थिक मदद मिल रही है। सरकारी रिपोर्ट में साफ तौर पर बब्बर खालसा और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे संगठनों का नाम लिया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों को क्रिप्टोकरेंसी, क्राउड-फंडिंग और कुछ संदिग्ध गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के जरिए पैसा पहुंचाया जा रहा है। अब जबकि कनाडा के पास इन संगठनों के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं तो आने वाले दिनों में इनकी फंडिंग रोकने के लिए बड़ी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
