भारत-अरब संबंध (सोर्स- सोशल मीडिया)
Indo-Arab strategic partnership meeting: भारत इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कार्यक्रम की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारत-अरब रणनीतिक साझेदारी बैठक के तहत करीब 22 अरब देशों के विदेश मंत्री नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। यह बैठक वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच आयोजित की जा रही है। भारत सरकार इस मंच का उपयोग रणनीतिक संवाद और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के लिए करेगी।
भारत सरकार इस हफ्ते 30–31 जनवरी को दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने जा रही है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में अरब लीग से जुड़े लगभग 22 देशों के विदेश मंत्रियों या प्रतिनिधियों के शामिल होने की पूरी संभावना है। कूटनीतिक नजरिए से यह बैठक भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है।
जब पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका का पूरा क्षेत्र गंभीर राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, तब यह बैठक काफी अहम हो जाती है। इस दौरान भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मज़बूत करने पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। वैश्विक तनाव के बीच यह संवाद क्षेत्र में शांति और सहयोग का नया रास्ता खोलने में बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है।
बैठक में गाजा संकट, इजरायल संघर्ष और लाल सागर में सुरक्षा की वर्तमान स्थिति जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना भी इस बैठक के मुख्य एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होगा। भारत इस आयोजन को केवल एक औपचारिकता न मानकर इसे रणनीतिक संवाद के एक सक्रिय मंच के तौर पर देख रहा है।
भारत और अरब देशों के बीच के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये ऊर्जा, व्यापार और प्रवासियों के जरिए गहरे हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और भारत की ऊर्जा जरूरतें इन देशों को हमारा प्रमुख साझेदार बनाती हैं। वर्तमान वैश्विक हालातों में दुनिया के तमाम देश भारत को एक संतुलित और बहुत ही भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
इस विशेष बैठक में बहरीन, कतर, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, सूडान, फिलिस्तीन, सोमालिया और लीबिया जैसे देश हिस्सा ले सकते हैं। बैठक के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय मुलाकातें भी होंगी, जिनमें निवेश और क्षेत्रीय सहयोग पर अलग से बात होगी। मॉरिटानिया, कोमोरोस और सूडान जैसे देशों के प्रतिनिधि भी व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर भारत के साथ चर्चा करने के लिए शामिल होंगे।
भारत की विदेश नीति के लिए अरब देशों के साथ यह चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित करती है। यह संवाद सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में व्यापारिक बाधाएं कम हों और निवेश के नए रास्ते खुल सकें जिससे दोनों क्षेत्रों का विकास हो। रणनीतिक रूप से यह बैठक रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में नए समझौतों की नींव रखने का काम कर सकती है जो आने वाले समय में सार्थक होगा।
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अंततः इस बैठक का लक्ष्य साझा हितों की रक्षा करना और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करना है। भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के माध्यम से अरब देशों के साथ मिलकर एक नया आर्थिक गलियारा बनाने की दिशा में भी अग्रसर हो सकता है। यह सहयोग भविष्य में वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने में एक निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।