जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री को किया फोन, क्या सुलझेगा होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल संकट का विवाद?
Jaishankar Iran Talks: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बात की। जानिए भारत के लिए क्यों बढ़ी है चिंता।
- Written By: अमन उपाध्याय
जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से की बात, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
India Iran Strategic Oil Talks Hormuz: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब एक वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान ने अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर तनाव चरम पर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर सुरक्षा का संकट
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा रहा। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में पैदा हुई असुरक्षित स्थिति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की ‘आक्रामक कार्रवाइयों’ को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इस संकट के लिए अमेरिका की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
भारत की दोहरी चिंता
भारत के लिए यह युद्ध केवल एक कूटनीतिक चुनौती नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट भी है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है, उसे ईरान द्वारा लगभग ब्लॉक कर दिए जाने से वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन के लिए एक गंभीर खतरा है।
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इसके अलावा, खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। विदेश मंत्री जयशंकर ने अराघची को इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया और स्पष्ट किया कि नई दिल्ली व्यापारिक जहाजों पर हमलों के सख्त खिलाफ है।
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वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका
जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी पश्चिम एशिया के संकट पर चर्चा की है। भारत लगातार इस बात की वकालत कर रहा है कि हिंसा को रोककर बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति बहाल की जानी चाहिए। हालांकि, 4 मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने जैसी घटनाओं ने स्थिति को और अधिक मुश्किल बना दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और तेल की कीमतों पर टिकी हैं।
