बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Protecting Bangladesh Press Freedom: बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की गिरती स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है और अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हाल ही में कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स और आठ अन्य संगठनों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से सरकार से पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने और मीडिया की आजादी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। वर्तमान में देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडरा रहे खतरों को दूर करना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
संयुक्त पत्र में मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से मीडिया की आजादी को प्राथमिकता देने और हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि डिजिटल सुरक्षा अधिनियम और साइबर सुरक्षा अधिनियम जैसे कठोर कानूनों के तहत पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों की तुरंत समीक्षा की जाए। ये कदम देश में प्रेस की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बहाल करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि पत्रकार, संगीतकार और कलाकार वर्तमान में हिंसक भीड़ और कट्टरपंथी समूहों के हमलों और धमकियों का सामना कर रहे हैं। संगठनों ने सरकार से आग्रह किया कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए कानून का दुरुपयोग और हिंसा को तत्काल प्रभाव से रोके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इंटरनेट बंद करने की घटनाओं और मनमानी सेंसरशिप को समाप्त कर अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने की मांग की है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने दिसंबर 2025 के दौरान अंतरिम सरकार के कार्यकाल में ‘प्रथम आलो’ और ‘डेली स्टार’ जैसे प्रमुख समाचार संस्थानों पर हुए हमलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इन हमलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सरकार से एक मजबूत और स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ बनाने का सुझाव दिया है। यह आयोग भविष्य में मीडिया कर्मियों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार को रोकने में मदद कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार अंतरिम सरकार के शासन के दौरान बड़े पैमाने पर मनमानी गिरफ्तारियों और हमलों के कारण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगातार खतरा बना हुआ है। बढ़ती हुई भीड़ हिंसा ने न केवल कानून के शासन को चुनौती दी है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों, महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को भी गंभीर संकट में डाल दिया है। सुरक्षा बलों द्वारा चटगांव जैसे क्षेत्रों में की जा रही मारपीट और यातना की घटनाओं ने मानवाधिकारों की स्थिति को और भी अधिक चिंताजनक बना दिया है।
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मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से अपने कार्यकाल का उपयोग व्यवस्थागत सुधारों को बढ़ावा देने और शासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए करने को कहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इन सुधारों के माध्यम से बांग्लादेश में सकारात्मक बदलाव की एक ऐसी विरासत बनेगी जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। लोकतंत्र की मजबूती के लिए सरकार को सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरानी चाहिए।