होर्मुज पर UN में बड़ा उलटफेर! चीन-रूस-फ्रांस की चाल से अमेरिका का प्लान ध्वस्त, क्या रूक जाएगा महायुद्ध?

Strait Of Hormuz में सैन्य बल प्रयोग के अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव पर UN में वोटिंग टल गई है। चीन, रूस और फ्रांस की तिकड़ी ने बहरीन और अमेरिका की योजना पर पानी फेर दिया।
Major Reversal at the UN over Hormuz! US Plan Thwarted by China, Russia, and France Will a Major War Be Averted?
होर्मुज की खाड़ी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Strait Of Hormuz UN Security Council Vote Postponed: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से एक बड़ी खबर सामने आई है। Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा और ईरान की नाकेबंदी को चुनौती देने के लिए लाए गए एक अहम प्रस्ताव पर शुक्रवार को होने वाली वोटिंग अचानक टाल दी गई है।

इसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश बहरीन के लिए एक बड़े कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चीन, रूस और फ्रांस की रणनीतिक घेराबंदी के कारण इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा है।

प्रस्ताव का मसौदा

बहरीन की ओर से पेश किए गए इस ड्राफ्ट प्रस्ताव में सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘जरूरी रक्षात्मक बल’ इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी गई थी। इसमें प्रावधान था कि देश अकेले या बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन बनाकर कार्रवाई कर सकते हैं। इस प्रस्ताव का प्राथमिक उद्देश्य ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग में डाली जा रही बाधाओं को रोकना और वैश्विक समुद्री व्यापार को सुचारू रूप से बहाल करना था। बहरीन के राजदूत जमाल अल-रोवाईई ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘अहम मोड़’ करार दिया था।

चीन, रूस और फ्रांस ने कैसे बिगाड़ा खेल?

भले ही आधिकारिक तौर पर वोटिंग टालने की वजह ‘गुड फ्राइडे’ की छुट्टी बताई गई है लेकिन कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि बड़ी शक्तियों के बीच गहरे मतभेद ही इसकी असली वजह हैं। चीन-रूस ने स्पष्ट कर दिया था कि वे इस तरह के किसी भी प्रस्ताव का वीटो (Veto) कर सकते हैं। चीन के राजदूत ने तर्क दिया कि बल प्रयोग की अनुमति देने से स्थिति और अधिक भड़क सकती है, जिसके गंभीर परिणाम होंगे। वहीं, ईरान के करीबी सहयोगी रूस ने इस तरह के एकतरफा सैन्य कदमों की कड़ी आलोचना की है। इस बीच, फ्रांस ने भी प्रस्ताव पर चिंता जताते हुए मांग की कि किसी भी कार्रवाई को केवल ‘रक्षात्मक’ दायरे तक सीमित रखा जाए और सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचा जाए।

होर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक हाहाकार

Hormuz का संकट पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा हो गई है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।

कूटनीति बनाम सैन्य टकराव

इतिहास गवाह है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा सदस्य देशों को बल प्रयोग की अनुमति देने वाले प्रस्ताव बेहद कम आए हैं जैसा कि 1990 में कुवैत संकट और 2011 में लीबिया के दौरान देखा गया था। वर्तमान में, वोटिंग टलना यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा परिषद में आम सहमति बनाना फिलहाल नामुमकिन है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट कूटनीति के जरिए सुलझेगा या क्षेत्र में सैन्य टकराव और बढ़ेगा।

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