El Nino Forecast: प्रशांत महासागर में उठी 1000 किमी लहर, भारत और दुनिया पर पड़ेगा भारी असर
El Nino Forecast: यूरोपीय सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में 1000 किमी चौड़ी लहर देखी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह मजबूत अल नीनो के आने का सीधा संकेत है। इससे दुनिया के मौसम पर काफी असर होगा।
- Written By: प्रिया सिंह
अल नीनो का खतरा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global El Nino Forecast Alert: प्रशांत महासागर के अंदर एक बहुत बड़ी और रहस्यमयी हलचल देखने को मिल रही है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी के एक खास सैटेलाइट ने वहां 1000 किमी चौड़ी पानी की लहर देखी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक बहुत ही मजबूत अल नीनो के आने का सीधा संकेत है। इस खतरनाक बदलाव का भारत समेत दुनिया के कई बड़े हिस्सों के मौसम पर असर पड़ेगा।
दुनिया भर में मौसम के पैटर्न और तापमान में इस साल बहुत ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और पर्यावरणीय प्रशासन (NOAA) ने भी अपनी बड़ी चेतावनी जारी की है। उनके मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच खतरा ज्यादा है। इस समय एक भयानक सुपर अल नीनो के आने की सबसे अधिक और संभावित स्थिति बन रही है।
जून तक आ सकता है अल नीनो
ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो के अनुसार अल नीनो के जून तक आने की पूरी संभावना है। यह ब्यूरो प्रशांत महासागर के मौसम बदलावों पर नजर रखने वाली एक बहुत ही भरोसेमंद संस्था है। नासा और यूरोप के एक नए सैटेलाइट ने इस अल नीनो के असली सुराग को पकड़ लिया है। साल 2020 में नासा द्वारा लॉन्च किया गया यूरोपीय सैटेलाइट हर 10 दिन में निगरानी करता है।
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Sentinel-6 Michael Freilich नाम का यह सैटेलाइट महासागर में पानी की ऊंचाई को मापता है। समुद्र के जलस्तर में होने वाले बड़े बदलावों से यह तापमान को बहुत ही प्रभावी ढंग से मापता है।सैटेलाइट के सटीक आकलन से पता चलता है कि मार्च की शुरुआत में एक नई लहर पूर्व की ओर बढ़ी। यह लहर करीब 1000 किमी चौड़ी थी जिसने समुद्र के अंदर एक बहुत बड़ा बदलाव किया। इसके चलते मई के मध्य तक पेरू के पास समुद्र का जलस्तर औसत से 15 सेमी ऊपर उठ गया।
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सुपर अल नीनो का अर्थ
अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जिसके चलते प्रशांत महासागर के पानी में भारी बदलाव होता है। एक मजबूत अल नीनो समुद्र की सतह के तापमान में 3.6 डिग्री फॉरेनहाइट की वृद्धि करता है। तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की इस अचानक हुई वृद्धि को ही सुपर अल नीनो कहा जाता है। NOAA के 14 मई के अनुमान के अनुसार 65 प्रतिशत संभावना है कि यह अल नीनो बहुत मजबूत होगा। यह इतिहास के सबसे खतरनाक और बड़े अल नीनो में से एक साबित हो सकता है। यह चरण जून से शुरू होकर फरवरी 2027 तक जारी रहने की संभावना है जो 20 प्रतिशत की वृद्धि है।
