Fozia Baloch Arrest: दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले पाकिस्तान में बलूच कार्यकर्ताओं पर अत्याचार
Fozia Baloch Arrest: दुनिया के लिए शांतिदूत बनने का दिखावा करने वाला पाकिस्तान बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच की गिरफ्तारी के बाद सवालों के घेरे में है। उनके भाई दादशाह को भी जबरन गायब कर दिया गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच (सोर्स-सोशल मीडिया)
Fozia Baloch arrest sparks outrage: पूरे पाकिस्तान में मानवाधिकारों को लेकर एक गंभीर और नई बहस छेड़ दी है। दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाला यह देश अब अपने ही नागरिकों पर भारी अत्याचार कर रहा है। बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख सदस्य फोजिया बलोच को कराची प्रेस क्लब से पुलिस ने अचानक हिरासत में लिया है। इस मनमानी और अवैध गिरफ्तारी का देश और दुनिया के तमाम प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।
फोजिया बलोच अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने लापता भाई का मुद्दा उठाने प्रेस क्लब पहुंची थीं। उनके भाई दादशाह बलोच को 21 अप्रैल को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया था। लापता भाई की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करने से भी पुलिस ने पूरी तरह से इनकार कर दिया था। न्याय की मांग करने वाले परिवारों को डराया जा रहा है और उनकी आवाज को बेरहमी से दबाया जा रहा है।
प्रेस क्लब से गिरफ्तारी
फोजिया बलोच शनिवार को कराची प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए पहुंची थीं। पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से रोककर जबरन अज्ञात स्थान पर भेज दिया। बलूच यकजेहती कमेटी ने सरकार से फोजिया और उनके भाई दादशाह की तुरंत रिहाई की जोरदार मांग की है।
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मानवाधिकारों का हनन
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने पाकिस्तान सरकार की इस हरकत की कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा कि यह पीड़ित परिवारों की आवाज दबाने और उन्हें न्याय से वंचित करने की गहरी साजिश है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की पुरजोर और गंभीर अपील की गई है।
महिलाओं पर अत्याचार
बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन आजाद ने अधिकारियों पर महिलाओं को गायब करने को सामान्य बनाने का आरोप लगाया है। संगठन के प्रवक्ता शोलन बलोच ने दावा किया कि इस साल करीब दो दर्जन बलूच महिलाओं को उठाया गया है। क्वेटा, कराची और खुजदार जैसे कई अलग-अलग इलाकों से महिलाओं को जबरन उठाकर कड़ी प्रताड़ना दी जा रही है।
आवाज दबाने की कोशिश
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान में असहमति के लिए सार्वजनिक जगह बहुत कम हो गई है। लापता लोगों की जानकारी मांगने वाले दुखी परिवारों को लगातार डराया और धमकाया जा रहा है। झूठे नैरेटिव गढ़कर बलूचिस्तान के शांतिपूर्ण आंदोलन को हर स्तर पर कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।
पुलिस का रवैया
दादशाह बलोच के अपहरण के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस में मामला दर्ज कराने की पूरी कोशिश की थी। पुलिस ने इस गंभीर मामले में किसी भी तरह की कानूनी शिकायत या रिपोर्ट लिखने से साफ मना कर दिया। इस रवैये से साफ जाहिर होता है कि सुरक्षा बल ही इन अपहरण की घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
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आंदोलन का भविष्य
फोजिया बलोच की रिहाई के लिए अब बड़ी संख्या में लोग अपना भारी विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। बलूच समुदाय का यह दर्द और आक्रोश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींच रहा है। अगर पाकिस्तान ने इस अत्याचार को नहीं रोका तो देश के भीतर बुनियादी अधिकारों का एक भयानक संकट खड़ा हो जाएगा।
