Gen-Z आंदोलन में घायल, अब भारत में जिंदगी की जंग लड़ रही पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री की पत्नी
Gen Z Protests: पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल पत्नी को धुएं के प्रभाव से फेफड़ों में संक्रमण हो गया है। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए नई दिल्ली लाया गया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
नेपाल में प्रदर्शन के दौरान आगजनी का फोटो, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nepal former PM wife treatment: नेपाल में 9 सितंबर को हुए जेन जेड आंदोलन के दौरान देश के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल की पत्नी गंभीर रूप से जल गईं। उनकी हालत नाजुक होने पर उन्हें उन्नत इलाज के लिए भारत लाया गया है। दरअसल, काठमांडू के दल्लू इलाके में प्रदर्शनकारियों ने खनाल के घर में आग लगा दी थी, जिससे उनकी पत्नी रवि लक्ष्मी चित्रकार बुरी तरह झुलस गईं। जेन जेड उन्हीं युवाओं को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है।
इस हादसे के दौरान चित्रकार करीब 15 प्रतिशत तक झुलस गई थीं और उनका इलाज कीर्तिपुर स्थित एक अस्पताल में चल रहा था। परिजनों के अनुसार, उनका बायां हाथ पूरी तरह जल चुका है, जबकि धुएं के असर से फेफड़ों पर संक्रमण हो गया है। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें आगे के उपचार के लिए नई दिल्ली लाया गया है। बता दें कि खनाल फरवरी से अगस्त 2011 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
काठमांडू सहित कई इलाकों में हिंसक विरोध प्रदर्शन
झलनाथ खनाल, नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के वरिष्ठ नेता रहे हैं और फरवरी 2011 से अगस्त 2011 तक नेपाल के प्रधानमंत्री के पद पर कार्यरत रहे। हाल के वर्षों में भी वे नेपाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। Gen-Z आंदोलन के दौरान राजधानी काठमांडू समेत अन्य जगहों पर भीषण बवाल और प्रदर्शन देखने को मिले। उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री खनाल के निवास पर भी हमला किया गया, जिसके दौरान आगजनी भी हुई। इस वारदात के बाद नेपाल की राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच, उनकी पत्नी रवि लक्ष्मी चित्रकार की हालत नाज़ुक बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत की निगरानी कर रही है।
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कई मंत्रियों के घरों पर हमला
गौरतलब है कि प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने संसद, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, वित्त मंत्री विष्णु पौडेल समेत कई मंत्रियों पर घरों में घुसकर हमला किया गया और उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। राजनीतिक दलों के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई, वहीं अखबारों के दफ्तरों में भी आग लगाई गई। कई बैंकों में लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। जिसके बाद हालात बिगड़ते देख प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
