Tibet Earthquake: तिब्बत में आधी रात धरती कांपी, रिक्टर स्केल पर 5.7 तीव्रता का भूकंप मापा गया
Tibet Earthquake: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने जानकारी दी है कि आधी रात के बाद तिब्बत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
- Written By: सौरभ शर्मा
भूकंप-सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
ल्हासा: तिब्बत से आधी रात के सन्नाटे धरती अचानक कांप उठी। सोमवार 2:41 बजे तेज झटकों ने पूरे इलाके को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.7 मापी गई। हालांकि अब तक जान-माल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों के बीच हलचल और चिंता साफ देखी जा रही है। प्रशासन सतर्क है और भूकंप की गहराई और असर का आकलन लगातार किया जा रहा है। वैज्ञानिक टीमें भी क्षेत्रीय हलचलों पर निगरानी रख रही हैं।
बता दें कि पृथ्वी के अंदर लगातार चल रही प्लेट्स की हलचल ही इस तरह के झटकों की बड़ी वजह होती है। जब ये टेक्टोनिक प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, तो अंदर जमा ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है और इससे धरती हिलती है। इसे ही हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। तिब्बत एक सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र है, जहां अक्सर हल्के से लेकर मध्यम तीव्रता तक के झटके महसूस होते रहते हैं।
An earthquake with a magnitude of 5.7 on the Richter Scale hit Tibet at 02.41 am (IST) today: National Center for Seismology (NCS) pic.twitter.com/NiHQVlTWWi — ANI (@ANI) May 11, 2025
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झटकों से कांपा तिब्बत, प्रशासन सतर्क
रविवार रात तिब्बत में जब लोग नींद में थे, तभी धरती हिलने लगी। भूकंप के ये झटके भारतीय समयानुसार 2:41 बजे महसूस किए गए। इसकी तीव्रता 5.7 थी और केंद्र तिब्बत क्षेत्र में ही स्थित था। भूकंप के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल तो बना, लेकिन किसी तरह की जनहानि की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। राहत की बात यह है कि आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
क्यों आते हैं भूकंप और कैसे मापा जाता है
पृथ्वी की सतह के नीचे सात टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार हिलती रहती हैं। इनके टकराव से ही भूकंप की स्थिति बनती है। जब दबाव बढ़ जाता है तो ये प्लेट्स टूटती हैं और धरती हिल जाती है। भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, जो 1 से 9 तक होता है। इससे पता चलता है कि झटका कितना गंभीर है। तिब्बत का इलाका इन भूगर्भीय हलचलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
