ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इतना मारा…पाकिस्तान को बदलना पड़ा संविधान, CDS अनिल चौहान ने खोल दी पोल
CDS Anil Chauhan on Pakistan Constitution Amendment: मई 2025 में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, जिससे उसे अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़े।
- Written By: अर्पित शुक्ला
CDS अनिल चौहान
Operation Sindoor: भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई में कई आतंकियों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई थी। इस ऑपरेशन का असर इतना गहरा रहा कि पाकिस्तान को अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए बदलाव यह साफ दिखाते हैं कि इस कार्रवाई ने इस्लामाबाद की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया।
जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को अपने सैन्य और संवैधानिक ढांचे में बड़े संशोधन करने पर विवश किया। पाकिस्तान ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी को खत्म कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का नया पद सृजित किया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम और गलवान गतिरोध तथा बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों से कई अहम सबक मिले हैं। अब भारत एक ऐसे मानकीकृत सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसे हर आपात स्थिति में लागू किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के कदम
पुणे में गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) में आयोजित पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम, खासकर उसके सैन्य कमांड ढांचे में बदलाव, संघर्ष के दौरान सामने आई गंभीर कमजोरियों को उजागर करते हैं। पाकिस्तान ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद समाप्त कर दिया है और उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया है। इसके साथ ही नेशनल स्ट्रेटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड की स्थापना भी की गई है। उन्होंने बताया कि इससे भूमि, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियों का केंद्रीकरण एक ही व्यक्ति के हाथ में हो गया है।
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सैन्य रणनीति में बदलाव
जनरल चौहान ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सैन्य रणनीति में बड़ा परिवर्तन देखा जा रहा है, जहां तकनीक तेजी से भूगोल की जगह युद्ध का प्रमुख कारक बनती जा रही है। ऐतिहासिक रूप से पानीपत से प्लासी तक भूगोल ने सैन्य अभियानों की दिशा तय की, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज टेक्नोलॉजी रणनीति को आगे बढ़ा रही है।” हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य के संघर्षों में नॉन-कॉन्टैक्ट और नॉन-काइनेटिक तरीकों पर निर्भरता बढ़ेगी, लेकिन पारंपरिक जमीनी युद्ध अब भी अत्यंत क्रूर और अधिक मैनपावर वाला बना हुआ है।
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पाकिस्तान और चीन के साथ विवादित सीमाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमें दोनों तरह के युद्ध के लिए तैयार रहना होगा एक तरफ स्मार्ट, तकनीक-आधारित युद्ध और दूसरी तरफ नुकसानदेह कॉन्टैक्ट युद्ध, हालांकि कोशिश यही होनी चाहिए कि बाद वाले से बचा जाए।”
