आधी रात फिर दहल उठी म्यांमार की धरती, भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग, जानें क्या रही तीव्रता

म्यांमार में आज तड़के 3.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में स्थित था। भले ही भूकंप की तीव्रता कम थी, लेकिन इसने लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया।
A 6.1 magnitude earthquake struck Turkey, causing three buildings to collapse, and panic gripped provinces including Istanbul.
भूकंप, सांकेतिक तस्वीर
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म्यांमार में आज मंगलवार तड़के लगभग 2:32 बजे (भारतीय समयानुसार) एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 दर्ज की गई। हालांकि तीव्रता ज्यादा नहीं थी, फिर भी इन झटकों ने लोगों को थोड़ी देर के लिए डराया। अब तक इस भूकंप से किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, म्यांमार में सोमवार को भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे यह क्षेत्र लगातार भूकंपीय गतिविधियों से प्रभावित होता दिख रहा है। इससे पहले म्यांमार में 23 से 24 मई को रात 12 बजे 28 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र भूमि से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर था। झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र की टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता इस प्रकार की घटनाओं के मुख्य कारण हैं। प्रशासन इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरत रहा है।

तिब्बत में भी भूकंप

तिब्बत में भी आज मंगलवार, 27 मई 2025 को भारतीय समयानुसार आधी रात 12:59 बजे एक तेज भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। इस भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, जो जमीन के बहुत नजदीक है। तिब्बत का क्षेत्र भूकंप के मामले में संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहाँ कभी-कभी हल्के झटके महसूस होते रहते हैं। फिलहाल, किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।

भूकंप के खतरे की सबसे बड़ी वजह

दरअसल, म्यांमार को भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। भूकंपीय जोखिम के वैश्विक मानचित्र पर म्यांमार को मध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्र (रेड जोन) में रखा गया है। म्यांमार में भूकंप के खतरे की सबसे बड़ी वजह सागाइंग फॉल्ट मानी जाती है। यह एक प्रमुख फॉल्ट लाइन है, जो भारतीय प्लेट और सुंडा प्लेट के बीच स्थित है। यह फॉल्ट म्यांमार के लगभग 1,200 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें दो भूखंड आपस में सटे हुए चलते हैं, जिनकी गति सालाना लगभग 11 मिमी से 18 मिमी के बीच मानी जाती है। इस धीमी गति से सरकने के कारण धीरे-धीरे तनाव जमा होता है, जो समय के साथ भूकंप के रूप में बाहर आता है।

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