अमेरिका-ईरान तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald Trump On Iran War: पश्चिम एशिया में जारी विनाशकारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति और युद्ध के मैदान में सनसनी फैला दी है। बुधवार, 18 मार्च 2026 को ट्रंप ने ईरान को एक ‘आतंकी राज्य’ संबोधित करते हुए उसे पूरी तरह खत्म करने की मंशा जाहिर की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान का लगभग पूरा शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व इजरायली और अमेरिकी हमलों में धराशायी हो चुका है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के माध्यम से अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा, ‘मैं सोच रहा हूं कि अगर हम आतंकी ईरानी राज्य के बचे-खुचे हिस्से को ‘समाप्त’ कर दें तो क्या होगा?’। ट्रंप का यह रुख संकेत देता है कि अमेरिका अब ईरान में केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि उसके वर्तमान सैन्य ढांचे को जड़ से मिटाने की योजना बना रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान को तेजी से “कारोबार से बाहर” कर रहे हैं और उसे दुनिया का नंबर-1 राज्य प्रायोजित आतंकवादी मानते हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में एक और चौंकाने वाली बात कही है। उन्होंने सुझाव दिया है कि ‘तथाकथित स्ट्रेट’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) की सुरक्षा और जिम्मेदारी उन देशों को सौंप दी जानी चाहिए जो इसका इस्तेमाल करते हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि चूंकि अमेरिका इस मार्ग का इस्तेमाल नहीं करता, इसलिए इसके संरक्षण का बोझ भी उन “गैर-प्रतिक्रियाशील सहयोगियों” पर होना चाहिए जो इससे लाभ उठाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उन सहयोगी देशों को सक्रिय करने के लिए है जो अब तक युद्ध में सीधे कूदने से बच रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह आक्रामक बयान पिछले 24 घंटों में हुई बड़ी घटनाओं के बाद आया है। ईरान की सुरक्षा रणनीति के मुख्य सूत्रधार अली लारीजानी और खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब जैसे दो सबसे बड़े सैन्य लीडर इजरायली हमलों में मारे जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे ईरान का कमांड और कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह पंगु हो गया है। इसी बढ़ते हौसले के बीच ट्रंप का बयान ईरान पर किसी बहुत बड़े हमले या टैक्टिकल हथियारों के इस्तेमाल की ओर इशारा कर रहा है।
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वहीं दूसरी ओर, इजरायल के रक्षा मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ उनकी कार्रवाई अभी रुकी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे आने वाले समय में दुनिया को और भी चौंकाने वाले परिणाम दिखाएंगे। भारत जैसे देशों ने मानवीय आधार पर ईरान को चिकित्सा सहायता भेजी है, जिसका तेहरान ने आभार व्यक्त किया है लेकिन सैन्य मोर्चे पर ईरान पूरी तरह अलग-थलग पड़ता दिखाई दे रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि ट्रंप के इस बयान ने ईरान के बचे-खुचे अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।