दावोस में डोनाल्ड ट्रंप का दावा नाटो नेता बुलाते हैं 'डैडी' (सोर्स-सोशल मीडिया)
US President Addresses World Economic Forum: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सत्र को संबोधित किया। उन्होंने इस वैश्विक मंच से नाटो की कड़ी आलोचना की और सदस्य देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए भारी दबाव डाला। ट्रंप ने दावा किया कि जब वे सख्त रुख अपनाते थे, तब नाटो के नेता उनके मजबूत नेतृत्व को पूरी तरह स्वीकार करते थे। इसी दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड और आइसलैंड के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करते हुए सुरक्षा और शांति के भविष्य का खाका पेश किया।
ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि नाटो के नेता निजी बातचीत में उन्हें ‘डैडी’ कहकर संबोधित करते थे। उनके अनुसार, जब वे नाटो के लिए अधिक सख्ती दिखाते थे, तब एक बहुत ही स्मार्ट आदमी ने उन्हें ‘डैडी’ कहा था। यह घटना पिछले साल ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले के दौरान हुई थी, जब मार्क रुत्ते ने कथित तौर पर यह शब्द कहा था।
भाषण के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड के बारे में बात करते हुए गलती से बार-बार आइसलैंड देश का जिक्र करना शुरू कर दिया। ट्रंप ने कहा कि जब उन्होंने आइसलैंड के बारे में बताया तो नाटो नेताओं ने उन्हें बहुत प्यार दिया और ‘डैडी’ पुकारा। हालांकि, हकीकत यह है कि आइसलैंड एक स्वतंत्र देश है और उसका ग्रीनलैंड के प्रशासन से कोई सीधा संबंध नहीं है।
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अपनी मांग को सही ठहराते हुए ट्रंप ने इसे मात्र “बर्फ का एक टुकड़ा” करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि यह छोटा सा हिस्सा दुनिया की शांति और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका द्वारा दशकों से दी गई मदद के बदले में यह एक बहुत ही छोटी सी मांग है।
ग्रीनलैंड वास्तव में डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जिसे ट्रंप सामरिक दृष्टि से अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इसे हासिल करने के लिए अपनी मांग पर अडिग हैं क्योंकि यह रक्षा के लिए जरूरी है। वे इसे एक ऐसी संपत्ति के रूप में देखते हैं जो भविष्य में आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बनाए रखेगी।
दावोस के इसी मंच से ट्रंप ने अन्य वैश्विक नेताओं और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी अपना सम्मान जताया। उन्होंने संकेत दिया कि वे जल्द ही एक अच्छी ट्रेड डील की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे आर्थिक संबंधों में सुधार होगा। नाटो और व्यापार के मुद्दों पर ट्रंप का यह आक्रामक अंदाज भविष्य की नई अंतरराष्ट्रीय नीतियों की ओर इशारा करता है।
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ट्रंप ने कहा कि वे नाटो को चलाने वाले व्यक्ति की तरह काम कर रहे थे और फिर अचानक ‘खराब इंसान’ बन गए। उनका दावा है कि यूरोपीय देश तब तक खुश थे जब तक वे अमेरिका के हितों और सुरक्षा खर्च पर बात कर रहे थे। अब ग्रीनलैंड और सुरक्षा खर्च जैसे मुद्दों पर ट्रंप का रुख दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।