ढाका विमान हादसे के बाद सड़कों पर बवाल, अवामी लीग का फूटा गुस्सा, मचा हड़कंप
Dhaka plane crash: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में वायुसेना का एक प्रशिक्षण विमान एक स्कूल की इमारत पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे छात्रों में भारी रोष फैल गया। जब अंतरिम सरकार के सलाहकार मौके पर...
- Written By: अमन उपाध्याय
ढाका विमान हादसे के बाद सड़कों पर बवाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
ढाका: बांग्लादेश में हाल ही में हुए विमान दुर्घटना के बाद जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध किया, जिस पर मुहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सख्त कार्रवाई की। इस कदम की अब अवामी लीग ने तीखी आलोचना की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में कम से कम 75 छात्र घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मंगलवार को हादसे की जगह और ढाका स्थित सचिवालय भवन के बाहर हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने अंतरिम सरकार के शिक्षा सलाहकार और शिक्षा सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग की। इस विमान हादसे में अब तक 32 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकतर बच्चे शामिल हैं, जबकि 165 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
विरोध में जोरदार नारेबाजी
युनुस के प्रेस सचिव और अंतरिम सरकार के कानून व शिक्षा सलाहकारों को छात्रों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। वे हादसे के बाद संस्थान का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन छात्रों ने उनके विरोध में जोरदार नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग करने लगे। छात्रों का यह आरोप था कि सरकार ने घटना से संबंधित तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है।
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ज़िम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम
अवामी लीग ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा, “माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज में फाइटर जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्टाफ के साथ लगातार अन्याय और दमन हो रहा है। बीते 24 घंटों में सरकार ने न केवल हताहतों की संख्या छुपाई, बल्कि हालात संभालने की बजाय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजकर साउंड ग्रेनेड, आंसू गैस और असली गोलियों का इस्तेमाल किया। इस तरह सरकार ने संकट के समय राष्ट्र के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकामी दिखाई है।”
छात्रों को लगा मानसिक आघात
बयान में आगे कहा गया कि “सरकार ने हताहतों की वास्तविक संख्या को पारदर्शी ढंग से सामने लाने के बजाय विरोध कर रहे लोगों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया, ताकि सच्चाई आम जनता से छिपी रह सके। लगातार मांग के बावजूद जब सरकार ने मृतकों की संख्या स्पष्ट नहीं की, तो दुखी छात्र, अभिभावक और शिक्षक सड़कों पर उतरे। इसके जवाब में पुलिस ने उन पर कार्रवाई की, जिससे मानवाधिकारों की खुली अवहेलना हुई और पीड़ित परिवारों तथा छात्रों को और अधिक मानसिक आघात पहुंचा।”
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पार्टी ने कहा कि लाखों की संख्या में छात्र, शिक्षक और अभिभावक सड़कों पर उतरकर जब सलाहकारों को हटाने की मांग कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि युनुस सरकार अब जनता का भरोसा खो चुकी है।
घातक हथियारों का इस्तेमाल
अवामी लीग ने यह भी कहा, “जनता का आक्रोश उस समय खुलकर सामने आ गया, जब युनुस शासन के दो सलाहकार और प्रेस सचिव दुर्घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे। वहां मौजूद छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उनके उस बयान को झूठा बता दिया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शियों की बातों को गलत जानकारी करार दिया गया था।”
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पार्टी ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि माइलस्टोन कॉलेज सहित कई जगहों पर छात्रों और शिक्षकों के विरुद्ध पुलिस बल की तैनाती, साउंड ग्रेनेड, असली गोलियों और घातक हथियारों का इस्तेमाल केवल मानवाधिकारों के संरक्षण की सरकारी जिम्मेदारी को ही कमजोर नहीं करता, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मौजूदा संकट की घड़ी में सरकार किस हद तक बल प्रयोग पर निर्भर हो गई है।
अस्पताल जाकर पीड़ितों के साथ तस्वीरें
पार्टी ने बयान में कहा, “हम इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं जिसने पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों की चिंगारी भड़का दी। मरीजों को अस्पतालों में प्रवेश से रोका गया, जबकि राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके सलाहकारों को अस्पताल जाकर पीड़ितों के साथ तस्वीरें खिंचवाने की छूट दी गई। यह न केवल चिकित्सा व्यवस्था को बाधित करने वाला कृत्य है, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए मानव पीड़ा के दोहन का क्रूर उदाहरण भी है।”
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
देश में फैलते अराजक हालात की ओर इशारा करते हुए अवामी लीग ने कहा कि विमान हादसे के पीड़ितों के लिए रक्तदान करने पहुंचे स्वयंसेवकों को पुलिस की मौजूदगी में हमला झेलना पड़ा। पत्रकारों को डराया गया, उन पर हमला किया गया और उन्हें घटनास्थल की सही तस्वीर सामने लाने से रोका गया। अंत में अवामी लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस दमनकारी रवैये के खिलाफ मुखर हों और शासन द्वारा प्रायोजित हिंसा की जांच व जवाबदेही की मांग कर रहे नागरिकों की जान की रक्षा करें।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
