बांग्लादेश में चुनावी खूनी खेल: ढाका में BNP नेता की गोली मारकर हत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
Dhaka BNP Leader Killed: बांग्लादेश में 12 फरवरी के मतदान से पहले ढाका में BNP नेता अजीजुर रहमान की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आचार संहिता के बावजूद हो रही हिंसा से सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
BNP नेता अजीजुर रहमान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bangladesh Political Violence Before Feb Polls 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक हिंसा का खूनी दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी ढाका में सुरक्षा घेरे और चुनावी आचार संहिता के बावजूद एक और प्रमुख विपक्षी नेता को निशाना बनाया गया है। इस ताजा वारदात ने देश की कानून-व्यवस्था और स्वतंत्र चुनाव कराने के दावों की पोल खोलकर रख दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय प्रशासन की कड़ी निगरानी के बाद भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं जारी हैं।
करवान बाजार में खूनी वारदात
राजधानी ढाका के व्यस्त करवान बाजार इलाके में बुधवार रात करीब 8:30 बजे स्वीच्छासेबक दल के नेता अजीजुर रहमान मुसाब्बिर की हत्या कर दी गई। अज्ञात हमलावरों ने मुसाब्बिर पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मुसाब्बिर पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की युवा इकाई में सक्रिय रहे थे और इलाके का चर्चित चेहरा थे।
नेताओं की हत्याएं
यह घटना बांग्लादेश में जारी सुनियोजित राजनीतिक हिंसा की कड़ी में एक और भयावह अध्याय है जिसने डर का माहौल बना दिया है। मुसाब्बिर की हत्या से महज दो दिन पहले जुबो दल के एक और नेता को भी इसी तरह गोली मारी गई थी। पिछले महीने 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की हत्या ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
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आचार संहिता के बीच कानून फेल
पूरे बांग्लादेश में चुनावी आचार संहिता लागू है लेकिन हमलावर सरेआम हथियारों का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के उत्सव को बाधित कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन का दावा है कि मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और हमलावरों की तलाश जारी है। हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना प्रशासन की विफलता और राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है।
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मतदान से पहले बढ़ता तनाव
जैसे-जैसे 12 फरवरी की तारीख नजदीक आ रही है विपक्षी कार्यकर्ताओं के बीच असुरक्षा की भावना और अधिक गहरी होती जा रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि ये हमले उन्हें चुनाव प्रचार से रोकने और समर्थकों को डराने के लिए किए जा रहे हैं। अगर हिंसा का यह दौर नहीं रुका तो मतदान के दिन बड़े पैमाने पर झड़पें होने की आशंका जताई जा रही है।
