ईरान में साइबर तबाही… तेल टैंकरों पर हैकर्स का हमला, काटा सैटेलाइट कनेक्शन; दुनिया में मचा हड़कंप
Iranian Oil tankers Hacked: ईरान के कई तेल टैंकर और मालवाहक जहाज़ साइबर हमले की चपेट में आ गए हैं। यह हमला हैकर ग्रुप लैब-दूख़्तेगान ने अंजाम दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान में साइबर तबाही, एआई फोटो
Iran Shipping Cyber Attack: तेहरान की समुद्री अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। लैब-दूख़्तेगान (Lab-Dookhtegan) नामक हैकर संगठन ने ईरान के कई तेल टैंकरों और मालवाहक जहाज़ों पर साइबर हमला किया है। इस ग्रुप का दावा है कि उसने ईरान के 60 से अधिक तेल टैंकरों और कार्गो शिप्स के कम्युनिकेशन सिस्टम को पूरी तरह ठप कर दिया है।
ईरान पर हुए इस साइबर हमले के बाद जहाजों और बंदरगाहों के बीच का सम्पर्क पूरी तरह टूट गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान पहले से ही कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रहा है, जिनके चलते उसकी शिपिंग कंपनियों को आधुनिक तकनीक, बीमा सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक पहुंच नहीं मिल पा रही। ऐसे में यह नया हमला उसके समुद्री बेड़ों को और भी अधिक असुरक्षित बना रहा है।
कैसे हुआ साइबर हमला?
हैकर्स के अनुसार, उन्होंने ईरान की Fanava Group नामक आईटी और टेलीकॉम कंपनी के सिस्टम में घुसपैठ की। यह कंपनी सैटेलाइट कम्युनिकेशन, डाटा स्टोरेज और पेमेंट सर्विसेज संभालती है। हमलावरों ने जहाजों के Linux ऑपरेटिंग सिस्टम पर रूट-लेवल एक्सेस हासिल कर लिया और Falcon नामक सॉफ्टवेयर को निष्क्रिय कर दिया। यही सॉफ्टवेयर जहाजों और तट के बीच सैटेलाइट कम्युनिकेशन को नियंत्रित करता था। इसके बंद होते ही जहाजों का AIS (ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) और सैटेलाइट ट्रैकिंग पूरी तरह ठप हो गई।
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प्रभावित बेड़े कौन-कौन से हैं?
NITC (नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी)- यह ईरान की सबसे बड़ी तेल टैंकर कंपनी है, जो हर साल लगभग 11 मिलियन टन कच्चा तेल परिवहन करती है। इसके जहाज़ अक्सर अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं ताकि प्रतिबंधों को चकमा दिया जा सके।
IRISL (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइंस)- करीब 115 जहाज़ों के साथ यह ईरान का सबसे बड़ा कार्गो बेड़ा है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र पहले ही इसे ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों में सहयोग करने के कारण प्रतिबंधित कर चुके हैं।
दोनों कंपनियों को वर्ष 2020 में अमेरिकी ट्रेजरी ने सीधे तौर पर IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की सहायता करने के आरोप में ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
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13 कंपनियों और आठ जहाजों पर नए प्रतिबंध
यह कोई पहली घटना नहीं है जब ईरानी शिपिंग पर साइबर हमला किया गया हो। इससे पहले मार्च 2025 में भी इसी हैकर ग्रुप ने 116 जहाजों की संचार प्रणाली ठप कर दी थी। उस समय यह दावा किया गया था कि यह हमला अमेरिका की यमन में हूथी विद्रोहियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के साथ तालमेल में किया गया था। अब हालिया साइबर हमलों के बीच अमेरिका ने 13 कंपनियों और आठ जहाजों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिन पर ईरानी तेल निर्यात और हथियारों की आपूर्ति में शामिल होने का आरोप है।
