जन्मदिन विशेष: वो कांग्रेस नेता जिसने पूरा किया राजीव गांधी का काम, फिर भी बयान से होता है पार्टी को नुकसान

गांधी परिवार के बेहद करीबी सैम पित्रोदा को लेकर ऐसा कहा जाता है कि जब मोबाइल फोन लाने का विचार किया गया था, तो उसमें सैम का महत्वपूर्ण योगदान था। आइए जानते हैं कई विवादित बोल को लेकर सुर्खियों में बने रहने वाले..
जन्मदिन विशेष: वो कांग्रेस नेता जिसने पूरा किया राजीव गांधी का काम, फिर भी बयान से होता है पार्टी को नुकसान
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा (सोर्स-सोशल मीडिया)
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नवभारत डेस्क: दिल्ली की अदालत ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस भेजा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत ने सैम पित्रोदा को भी नोटिस जारी किया है। सैम पित्रोदा को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। सैम पित्रोदा का जन्म 4 मई 1942 को ओडिशा में एक गुजराती परिवार में हुआ था। उनका असली नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है।

उनके पिता बढ़ई का काम करते थे और चाहते थे कि सैम गुजराती भाषा सीखें, इसलिए उनकी प्रारंभिक पढ़ाई गुजरात में हुई। उन्होंने फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर डिग्री महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के इलिनॉइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से भी उच्च शिक्षा ली। सैम पित्रोदा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस का अध्यक्ष भी हैं।

राजीव गांधी ने सौंपा था ये जिम्मा

सैम पित्रोदा का भारत की सूचना क्रांति बेहद अहम रोल माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब मोबाइल फोन लाने का विचार किया गया था, तो उसमें सैम का महत्वपूर्ण योगदान था। वह 2005 से 2009 तक भारतीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष रहे। 1984 में उन्होंने दूरसंचार के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलिमैटिक्स' (सी-डॉट) की स्थापना की थी। राजीव गांधी ने उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार नीति बनाने का जिम्मा सौंपा। इसके अलावा, सैम पित्रोदा यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जन सूचना संरचना और नवाचार सलाहकार भी रहे। सैम पित्रोदा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को राजनीतिक सलाह भी देते रहते हैं। राहुल की छवि में जो बदलाव आया है, उसे लेकर कांग्रेस के कई नेता पित्रोदा को इसका श्रेय देते हैं। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद सैम ने कहा था कि उन्होंने अपना सबसे करीबी दोस्त खो दिया। इस दुखद घटना के बाद उनका मन भारत में नहीं लगा।

इस तरह से पड़ा 'सैम' नाम

पढ़ाई पूरी करने के बाद सैम ने टेलीविज़न ट्यूनर बनाने वाली कंपनी एक कंपनी में काम करना शुरू किया। उस समय उनका नाम सत्यनारायण पित्रोदा था। एक दिन जब उन्हें वेतन का चेक मिला, तो उसमें उनका नाम 'सैम' लिखा था। जब उन्होंने इस बारे में शिकायत की, तो वेतन संबंधित महिला ने कहा कि तुम्हारा नाम बहुत लंबा था, इसलिए उसने इसे छोटा कर दिया। और इस तरह, सत्यनारायण पित्रोदा के नाम से सैम पित्रोदा बन गए।

सैम पित्रोदा द्वारा दिए गए यहां कुछ विवादित बयान

तारीख बयान
जून 2023 भारत में बहुत लोग राम और हनुमान मंदिर की चर्चा करते हैं, लेकिन बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
2019 (बालाकोट एयरस्ट्राइक) भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट एयरस्ट्राइक में मारे गए लोगों के बारे में सबूत मांगे गए थे।
मई 2019 (सिख दंगे) 1984 के सिख दंगों पर कहा गया था कि "जो हुआ, सो हुआ।"
संविधान निर्माण पर संविधान बनाने में डॉ. आंबेडकर से अधिक पंडित नेहरू का योगदान था।
अप्रैल 2019 सैम पित्रोदा ने कहा था कि मध्यम वर्ग को स्वार्थी नहीं होना चाहिए।
भारत के लोग और उनका रूप पूर्वी भारत के लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिमी लोग अरेबियन जैसे, उत्तर के लोग गोरे और दक्षिण के लोग अफ्रीकी जैसे दिखते हैं।
अमेरिका की विरासत अमेरिका की विरासत टैक्स पर आधारित चर्चा भारत में भी होनी चाहिए।
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