राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और शी जिनपिंग, (सोर्स- सोशल मीडिया)
China Red Cross Society Donation: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मानवीय संकट के बीच चीन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चीन की ‘रेड क्रॉस सोसाइटी’ (RCSC) ने घोषणा की है कि वह ईरान की ‘रेड क्रेसेंट सोसाइटी’ (IRCS) को 2 लाख डॉलर (लगभग 1.68 करोड़ रुपये) की आपातकालीन नकद सहायता प्रदान करेगी। यह सहायता मुख्य रूप से युद्ध और विस्थापन से प्रभावित लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए दी जा रही है।
पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट (विशेषकर ईरान, इजरायल और लेबनान के बीच) में बढ़े सैन्य संघर्ष ने बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के अनुसार, रेड क्रॉस सोसाइटी ऑफ चाइना ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता पूरी तरह से मानवीय आधार पर दी गई है। इस धनराशि का उपयोग ईरान में शरणार्थियों की मदद, चिकित्सा आपूर्ति की कमी को दूर करने और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी राहत कार्य चलाने के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस छोटी लेकिन प्रतीकात्मक सहायता के पीछे गहरे रणनीतिक संकेत छिपे हैं।
भारत जैसे देशों में इस खबर को ऊर्जा संकट के चश्मे से देखा जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में भी तेल और ऊर्जा सुरक्षा पर बहस छिड़ी है। चीन द्वारा ईरान को दी गई इस मदद पर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका को एक संदेश है कि चीन उन देशों के साथ मजबूती से खड़ा है जिन पर अमेरिका दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
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चीन की रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा दी गई यह 2 लाख डॉलर की राशि शायद युद्ध के भारी नुकसान के सामने कम लगे, लेकिन यह भविष्य के ‘चीन-ईरान-रूस’ गठबंधन की मजबूती को दर्शाती है। चीन ने एक बार फिर साबित किया है कि वह पश्चिम एशिया की राजनीति में न केवल एक आर्थिक शक्ति है, बल्कि एक सक्रिय मानवीय खिलाड़ी के रूप में भी अपनी जगह बना रहा है।