ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत के ताइवान पहुंचते ही भड़का चीन, उठा लिया ये खतरनाक कदम
Australian warship : ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत के ताइवान में प्रवेश होने से चीन बौखला गया है। चीनी सेना ने जहाज का पीछा किया। उसकी पूरी निगरानी की। इससे समंदर में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
- Written By: रंजन कुमार
ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत। इमेज-सोशल मीडिया
China PLA : ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच पहले से तनाव चल रहा और अब इस तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। अमेरिका के करीबी सहयोगी ऑस्ट्रेलिया का युद्धपोत एचएमएएस टूवूम्बा 20 और 21 फरवरी को ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरा। इस कदम से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) बुरी तरह भड़क गई और उसने इस जंगी जहाज को अपने रडार पर ले लिया।
चीनी स्टेट मीडिया के सूत्रों के मुताबिक जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई जहाज ने इस विवादित समुद्री इलाके में प्रवेश किया, चीनी सेना तुरंत अलर्ट हो गई। पूरी यात्रा के दौरान चीन ने इस जहाज की ट्रैकिंग की, निगरानी रखी और चेतावनी भी दी।
आखिर क्यों इतना बवाल?
इस विवाद की जड़ एक बुनियादी मतभेद में है। चीन पूरे ताइवान और इस समुद्री रास्ते को अपना संप्रभु हिस्सा मानता है। दूसरी तरफ ताइवान, अमेरिका और उसके सहयोगी इसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र मानते हैं, जहां से किसी भी देश के जहाज को गुजरने का अधिकार है। इसी साल जनवरी में अमेरिकी नौसेना के दो बड़े जहाज, गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक USS John Finn और सर्वे शिप USNS Mary Sears भी इसी रास्ते से गुजरे थे। तब अमेरिका ने साफ कहा था कि वे फ्रीडम ऑफ नेविगेशन के सिद्धांत पर कायम रहेंगे।
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कोई नई बात नहीं, फिर भी तनाव क्यों?
दिसंबर 2025 में ताइपे टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक साल में अमेरिका, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, यूके और फ्रांस सहित आठ देशों ने अपने सैन्य जहाज इस रास्ते से भेजे। इसके जवाब में चीन ने दिसंबर 2025 में जस्टिस मिशन नाम से बड़ा सैन्य अभ्यास किया, जिसका मकसद ताइवान को घेरने और विदेशी ताकतों को रोकने की क्षमता का प्रदर्शन करना था।
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आगे क्या?
इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। चीन ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई और अपनी संप्रभुता के खिलाफ खतरा बताया है। ताइवान ने इस कदम का स्वागत किया है। रक्षा विशेषज्ञों की नजर अब इस पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया और युद्धपोत इस इलाके में भेजेंगे। अगर ऐसा होता है तो चीन द्वारा सैन्य अभ्यास और आक्रामक गश्त और बढ़ सकती है।
