ताइवान से रूस-यूक्रेन युद्ध तक… 9 साल बाद चीन जाएंगे ट्रंप, क्या 3 दिनों की इस यात्रा से सुलझेंगे ये मुद्दे?
Donald Trump China Visit: ट्रंप 31 मार्च से चीन की तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। जहां एक तरफ वह जिनपिंग से व्यापारिक तनाव कम करने की कोशिश करेंगे, वहीं SC ने उनके टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग, फोटो (सो. सोसल मीडिया)
Donald Trump Jinping Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे। यह दौरा लगभग नौ साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, क्योंकि इससे पहले ट्रंप ने आखिरी बार 2017 में चीन की यात्रा की थी।
इस हाई-प्रोफाइल यात्रा का मुख्य उद्देश्य चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करना और दोनों महाशक्तियों के बीच पिछले कई वर्षों से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करना है।
जिनपिंग के साथ अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
योजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बीजिंग में होने वाली इस मुलाकात के दौरान व्यापार, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जैसे गंभीर और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर व्यापक बातचीत होगी। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह भी संकेत दिया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल के अंत तक व्हाइट हाउस की यात्रा पर आ सकते हैं।
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गौरतलब है कि शी जिनपिंग आखिरी बार 2023 में अमेरिका आए थे। ट्रंप का मानना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करना वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट से लगा करारा झटका
चीन दौरे की तैयारियों के बीच, अपने ही देश में ट्रंप को एक बड़ी कानूनी हार का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली 6-3 की बेंच ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें कहा गया था कि ट्रंप ने बड़े पैमाने पर आयात कर लगाने के लिए ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया है।
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अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े इस कानून का सहारा लेकर वैश्विक स्तर पर टैरिफ लागू करना राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकारों के दायरे से बाहर है। ट्रंप ने सत्ता में लौटने के बाद स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे कई क्षेत्रों पर भारी टैरिफ लगाने की नीति अपनाई थी जिसे अब अदालत ने वैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं माना है।
व्यापारिक तनाव कम करने की चुनौती
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन अपनी टैरिफ आधारित नीति के जरिए चीन और अन्य देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। अब जबकि उनकी इस प्रमुख नीति को अदालत ने खारिज कर दिया है, बीजिंग में शी जिनपिंग के साथ होने वाली वार्ता में ट्रंप की रणनीति क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि टैरिफ पर लगे इस झटके के बाद ट्रंप अब कूटनीतिक रास्तों से व्यापारिक समझौतों को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।
