शी जिनपिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
China Middle East Humanitarian Support: मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच अब अन्य वैश्विक शक्तियां भी सक्रिय हो गई हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच, चीन ने इस मानवीय संकट को कम करने के लिए हाथ बढ़ाया है। मंगलवार को चीन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि वह ईरान, लेबनान और इस संघर्ष से प्रभावित दो अन्य देशों को आपातकालीन मानवीय सहायता प्रदान करेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि बीजिंग ने स्थानीय लोगों द्वारा सामना की जा रही अत्यधिक कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से ईरान, जॉर्डन, लेबनान और इराक को आपातकालीन मानवीय सहायता भेजने का निर्णय लिया है। लिन ने कहा कि मौजूदा संघर्ष के कारण इन देशों के नागरिकों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है और चीन उनके प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त करता है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चीनी विदेश मंत्री ने चिंता जताई कि पश्चिम एशिया में जारी यह संकट अब एक बड़ा मानवीय आपातकाल बन चुका है। इस क्षेत्र में पहले से ही लगभग 2.5 करोड़ लोग युद्ध की विभीषिका से प्रभावित हैं। लिन जियान के अनुसार, ईरान में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई है, जबकि लेबनान में लगभग 8,00,000 लोग अपने घरों से विस्थापित होकर शरणार्थी बनने को मजबूर हुए हैं। जॉर्डन और इराक पर भी इस जंग का प्रतिकूल असर पड़ा है।
चीन ने केवल घोषणा ही नहीं की है, बल्कि आर्थिक सहायता भी शुरू कर दी है। पिछले सप्ताह ही, चीन ने ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए बम हमले के पीड़ितों के लिए 2,00,000 अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन सहायता की घोषणा की थी। इस हमले में कई निर्दोष स्कूली बच्चे और उनके परिजन प्रभावित हुए थे।
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एक ओर जहां अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के सैन्य और आर्थिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं चीन का यह कदम उसे क्षेत्र में एक ‘शांति दूत’ और ‘मददगार’ के रूप में पेश करने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, चीन ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता वर्तमान में वहां फंसे निर्दोष लोगों की जान बचाना और मानवीय आपदा को रोकना है।