OPEC से UAE की विदाई: क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? जानें कच्चे तेल के बाजार में मचे भूचाल के मायने
UAE OPEC Exit: संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक छोड़ने के फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। जानें इसके वजह से भारत में ईंधन की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक एआई फोटो
UAE OPEC Exit Impact On India Oil Market: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा अचानक ओपेक (OPEC) और ओपेक+ को अलविदा कहने के फैसले ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे समय में जब ईरान युद्ध के कारण पहले से ही तेल का संकट बना हुआ है और वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर है, यूएई का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली इस उथल-पुथल का असर भारत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
जानकारों के अनुसार, यूएई से तेल की सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा सकती है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
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हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत तेल के लिए केवल किसी एक देश पर निर्भर नहीं है, इसलिए घरेलू बाजार में कीमतों में तत्काल बहुत बड़े उछाल की संभावना कम है। भविष्य में ईंधन की कीमतें सरकार की नीतियों, टैक्स ढांचे और वैश्विक तेल बाजार की स्थितियों पर अधिक निर्भर करेंगी।
UAE ने क्यों छोड़ा ओपेक का साथ?
माना जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और तेल की सप्लाई की गति धीमी होने के कारण यूएई ने यह कड़ा कदम उठाया है। ज्ञात हो कि दुनिया के कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जो वर्तमान में ईरान युद्ध की वजह से बाधित है।
ओपेक का सदस्य होने के नाते यूएई पर उत्पादन को लेकर कई पाबंदियां थीं। अब इस संगठन से बाहर होकर यूएई अपनी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होगा।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लंबे समय में यह फैसला भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। ओपेक से बाहर निकलने के बाद यूएई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कम दाम पर तेल की पेशकश कर सकता है।
भारत और यूएई के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए, भारत इस स्थिति का लाभ उठा सकता है और देश के लिए सस्ते तेल का एक नया रास्ता खुल सकता है।
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अब क्या होगा ओपेक का भविष्य?
यूएई के इस फैसले से ओपेक और ओपेक+ संगठन के कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले भी ओपेक पर तेल की कीमतें बढ़ाकर दुनिया को ‘लूटने’ का आरोप लगा चुके हैं उनके लिए यह एक बड़ी खुशखबरी की तरह है। ट्रंप का मानना रहा है कि खाड़ी देश सुरक्षा के बदले ऊंची कीमतें वसूलते हैं, ऐसे में यूएई का बाहर आना वैश्विक तेल राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
