खाड़ी देशों में नागरिकता संकट: कुवैत और बहरीन ने अपने ही हजारों नागरिकों को किया बेदखल; ईरान कनेक्शन आया सामने
Gulf Countries Citizenship Revocation: ईरान के साथ युद्ध के बाद खाड़ी देशों में एक खतरनाक ट्रेंड शुरू हो गया है। कुवैत और बहरीन ने ईरान समर्थकों की नागरिकता छीनने का बड़ा अभियान शुरू किया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो, (सो. सोशल मीडिया)
Gulf Countries Citizenship Revocation Kuwait Bahrain: मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच खाड़ी देशों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान के साथ हुए संघर्ष के बाद अब कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश अपने ही नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक, इन देशों ने अपने ही लोगों की नागरिकता रद्द करना शुरू कर दिया है जिसे जानकार एक ‘खतरनाक युग’ की शुरुआत मान रहे हैं।
1266 नागरिकों को दिखाया बाहर का रास्ता
कुवैत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1266 लोगों की नागरिकता छीन ली है। नागरिकता गंवाने वालों में केवल आम नागरिक ही नहीं बल्कि नामचीन हस्तियां भी शामिल हैं, जिनमें पूर्व सांसद अल-फिक्र, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अहमद अल-तराबुलसी और मशहूर लेखक अब्दुलअजीज अल-सारी के नाम प्रमुख हैं।
कुवैत सरकार का तर्क है कि ये लोग मूल रूप से कुवैती नहीं हैं और उन्होंने शादी या अन्य माध्यमों से यहां की स्थाई नागरिकता हासिल की थी। हालांकि, इसके पीछे असली वजह ईरान और उसके समर्थकों पर निशाना साधना माना जा रहा है, क्योंकि युद्ध के दौरान यूएई के बाद सबसे ज्यादा हमले कुवैत पर ही हुए थे।
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जश्न मनाने पर 69 लोगों की नागरिकता रद्द
कुवैत की कार्रवाई के महज 24 घंटे के भीतर बहरीन ने भी 69 नागरिकों की नागरिकता छीनने का ऐलान कर दिया। बहरीन सरकार के अनुसार, राजा (King) के आदेश पर यह फैसला उन लोगों के खिलाफ लिया गया है जिन्होंने ईरान युद्ध के दौरान जश्न मनाया था। उल्लेखनीय है कि बहरीन एक शिया बहुल देश है लेकिन वहां सरकार में सुन्नी समुदाय का दबदबा है।
जब युद्ध के दौरान बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे थे तब कुछ नागरिकों द्वारा खुशी जताने को सरकार ने देशद्रोह के रूप में देखा और उनकी नागरिकता रद्द कर दी। इन प्रभावित लोगों की सूची में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
बढ़ता दमन और मानवाधिकारों की चिंता
यूएई ने भी हाल ही में ईरानी मूल के नागरिकों की नागरिकता रद्द करने के संकेत दिए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड आने वाले समय में हजारों लोगों को ‘स्टेटलेस’ (बिना देश का) बना सकता है।
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ब्रिटेन स्थित बहरीन इंस्टीट्यूट फॉर राइट्स एंड डेमोक्रेसी के निदेशक सैयद अहमद अलवदाई ने इसे एक ‘खतरनाक युग’ करार दिया है। उनके अनुसार, इस कूटनीति के जरिए सरकारें अपनी मर्जी से नागरिकों का दमन कर सकेंगी और खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा होगा।
