China Aircraft Carrier: चीन के चौथे परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर ‘हे जियान’ ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
China Aircraft Carrier: चीनी नौसेना ने अपनी 77वीं वर्षगांठ पर जारी नए वीडियो के जरिए अपने चौथे परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर 'हे जियान' की एक खास झलक दिखाई है। इससे अमेरिका और भारत की चिंताएं बढ़ी हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
चीनी नौसेना का परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर 'हे जियान' (सोर्स-सोशल मीडिया)
New China Aircraft Carrier Video: चीन की नौसेना ने समुद्र में अपना दबदबा बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपनी 77वीं वर्षगांठ के मौके पर एक नया वीडियो जारी किया है। इस खास चीन के नए विमान वाहक का वीडियो ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। तटीय रक्षा से लेकर गहरे समुद्र तक चीनी नौसेना की बढ़ती ताकत इसमें दिखाई गई है।
इस वीडियो में पुराने जहाजों के अधिकारियों को नए लोगों को कंपास सौंपते दिखाया गया है। इसके साथ ही चौथे संभावित एयरक्राफ्ट कैरियर ‘हे जियान’ के निर्माण का भी बड़ा संकेत मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन का पहला पूरी तरह से परमाणु ऊर्जा संचालित जहाज होगा। इस नए जंगी जहाज के आने से अमेरिका और भारत जैसे देशों की रणनीतिक चिंताएं बढ़ेंगी।
हे जियान का संकेत
चीनी नौसेना के वीडियो में चौथे जहाज का नाम ‘हे जियान’ होने की मजबूत संभावना जताई गई है। चीनी भाषा में ‘हे’ शब्द का सीधा मतलब परमाणु ऊर्जा से जुड़ा हुआ माना जाता है। अगर यह सच है तो यह दुनिया में चीन की नौसैनिक ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
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सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा
डालियान शिपयार्ड की सैटेलाइट तस्वीरों में एक बहुत ही विशालकाय जहाज बनता हुआ साफ दिख रहा है। यह जहाज आकार में अमेरिका के जेराल्ड आर. फोर्ड श्रेणी के जंगी जहाजों के बिल्कुल समान है। इन तस्वीरों में जहाज पर परमाणु रिएक्टर रोकथाम जैसी संरचनाएं भी आसानी से देखी जा सकती हैं।
पारंपरिक जहाजों से अलग
वर्तमान में चीन के पास लियाओनिंग, शेडोंग और फुजियान नाम के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं। ये तीनों विमानवाहक पोत अभी तक पूरी तरह से पारंपरिक ईंधन की मदद से ही चलते हैं। लेकिन नया कैरियर चीन का पहला स्वदेशी और परमाणु ऊर्जा से संचालित होने वाला जहाज होगा।
फुजियान की खूबियां
पिछले साल नवंबर में चीन ने अपना तीसरा और सबसे आधुनिक कैरियर ‘फुजियान’ नौसेना में शामिल किया था। लगभग 80,000 टन वजनी यह जहाज अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल तकनीक से पूरी तरह लैस है। अब तक यह खास और उन्नत तकनीक केवल अमेरिकी नौसेना के जहाजों के पास ही मौजूद थी।
जहाजों की तुलना
चीन के पास इस समय कुल 234 जंगी युद्धपोतों का एक बहुत बड़ा और मजबूत बेड़ा है। यह संख्या सीधे तौर पर अमेरिका के 219 जहाजों की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है। हालांकि अमेरिका के पास अभी भी 11 परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर की जबरदस्त ताकत मौजूद है।
वैश्विक मार्गों पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार चीन अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के कारण यह विस्तार तेजी से कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर अपना पूर्ण नियंत्रण और एकाधिकार स्थापित करना है। फुजियान के बाद चीन अब हिंद महासागर और अरब सागर में भी अपनी गश्त बढ़ा सकता है।
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भारत के लिए चिंता
चीन जिबूती, ग्वादर और हंबनटोटा जैसे ठिकानों से भारत के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय हो गया है। इन गतिविधियों ने भारतीय नौसेना के सामने कई नई और गंभीर सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसके जवाब में भारत भी आईएनएस विक्रांत और विक्रमादित्य से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
