ट्रंप डील भूल जाओ… कबाड़ है F-35! पहले भारत और अब जापान में अटका, दुनिया में उठने लगे सवाल
F35 Emergency Landing in Japan: केरल के बाद अब जापान में ब्रिटेन का एफ-35 विमान तकनीकी खराबी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करने को मजबूर हो गया। डोनाल्ड ट्रंप और उनकी कंपनी ने भारत को एफ-35 लड़ाकू विमान...
- Written By: अमन उपाध्याय
F-35, फोटो ( सो, सोशल मीडिया)
F-35 Fighter Issues: F-35 लड़ाकू विमान की तकनीकी दिक्कतें फिर से चर्चा में आ गई हैं। जापान के कागोशिमा प्रांत में रविवार को एक एयरपोर्ट पर ब्रिटेन का F-35B स्टील्थ फाइटर विमान अचानक तकनीकी खराबी के कारण आपातकालीन लैंडिंग करने को मजबूर हो गया। यह अमेरिका का सबसे आधुनिक और महंगा लड़ाकू विमान है, जो अक्सर तकनीकी समस्याओं के चलते सुर्खियों में रहता है। इस बार भी विमान में खराबी आई, जिसके चलते उसे सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरना पड़ा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान प्रशिक्षण अभियान पर निकला और ब्रिटिश विमानवाहक पोत समूह के साथ तैनात था। इस घटना के बाद एक बार फिर इस फाइटर जेट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि पहले भी इस मॉडल के विमानों में तकनीकी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।
दुनियाभर में खड़े हो रहे सवाल
ब्रिटेन का एक F-35B लड़ाकू विमान अभी हाल ही में तकनीकी खराबी के कारण केरल के कोचीन एयरपोर्ट पर आकस्मिक लैंडिंग करने के लिए मजबूर हुआ था। इसके बाद वह विमान कई हफ्तों तक वहीं ठहरा रहा, क्योंकि उसके स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत के लिए विशेषज्ञ टीम को वहां भेजने में काफी वक्त लगा। उस समय भी F-35 विमानों की तकनीकी दिक्कतों और उनकी मरम्मत में होने वाले भारी खर्च को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खूब चर्चा और सवाल खड़े हो रहे हैं।
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भारत को बेचने की कोशिश कर रहा अमेरिका
अमेरिका के इस फाइटर प्लेन पर अब सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह विमान वास्तव में सुरक्षित और भरोसेमंद है, खासकर तब जब अमेरिका भारत को इसे खरीदने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
काफी समय से US भारत को अपना यह फाइटर जेट बेचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारतीय वायुसेना ने अब तक इसे खरीदने में रुचि नहीं दिखाई है। जापान में हाल ही में हुई घटना ने इस विमान की सुरक्षा और उसकी क्षमताओं पर उठ रहे सवालों को और भी गहरा बना दिया है।
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तकनीकी समस्याओं के कारण विवाद
इसके पीछे मुख्य कारण हैं इस विमान की महंगी मेंटेनेंस लागत, बार-बार तकनीकी खराबियां और लॉजिस्टिक सपोर्ट में देरी। भारत पहले से ही सुखोई, राफेल और स्वदेशी तेजस विमानों के संयोजन पर काम कर रहा है और उसकी प्राथमिकता स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की है। ऐसे में एक ऐसा विमान खरीदना जो लगातार तकनीकी समस्याओं के कारण विवादों में रहता हो, न तो रणनीतिक दृष्टि से सही होगा और न ही आर्थिक तौर पर लाभदायक।
डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की टीम ने भारत को इस विमान की बिक्री कई बार प्रस्तावित की, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। जापान और केरल की हाल की घटनाएं यह साबित करती हैं कि भले ही यह विमान कागज पर स्टेल्थ डिजाइन, उन्नत एवियोनिक्स और मल्टी-रोल क्षमताओं से लैस हो, लेकिन असल में इसकी ऑपरेशनल क्षमता और भरोसेमंदी पर गंभीर सवाल उठते हैं।
