BLA के अटैक से पाकिस्तानी सेना के उड़े होश, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
BLA Operation Herof 2.0 Balochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होती नजर आ रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन हीरॉफ 2.0’ ने पिछले 35 घंटों से प्रांत के कई शहरों में तांडव मचा रखा है।
राजधानी क्वेटा को छोड़कर बाकी लगभग सभी प्रमुख शहरों से लगातार धमाकों और गोलीबारी की खबरें आ रही हैं। विशेष रूप से ग्वादर में पाकिस्तानी सेना और बलूच लड़ाकों के बीच सीधी और भीषण मुठभेड़ चल रही है, जहां रविवार सुबह से ही कई बड़े धमाके हो चुके हैं।
150 सैनिक बनाम 92 लड़ाके इस संघर्ष में दोनों पक्षों की ओर से हताहतों के बड़े दावे किए जा रहे हैं। BLA का दावा है कि उसके लड़ाकों ने अब तक 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों, रेंजर्स, एफसी (FC) और पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना ने अपनी जवाबी कार्रवाई में 92 बलूच लड़ाकों को मारने का दावा किया है जिनमें 3 फिदायीन हमलावर भी शामिल थे।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन विद्रोहियों को पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने ‘एक SHO की मार’ बताया था उन्हें रोकने के लिए अब सेना को हेलीकॉप्टर और ड्रोन का सहारा लेना पड़ रहा है।
विद्रोहियों ने नोश्की शहर में पिछले 24 घंटों से पुलिस थाने पर कब्जा कर रखा है और प्रमुख राजमार्गों को बंद कर दिया है। हालांकि, BLA ने बंधक बनाए गए नोश्की के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद हुसैन को रिहा कर दिया है। संगठन का कहना है कि उनकी लड़ाई पुलिस या सरकारी कर्मचारियों से नहीं है बल्कि वे केवल तब हमला करते हैं जब पुलिस सेना का साथ देती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बशीर जेब बलूच की अगुआई वाला BLA पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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बिगड़ती स्थिति को देखते हुए बलूचिस्तान के गृह मंत्रालय ने अगले एक महीने के लिए कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। प्रांत में मोटरसाइकिल पर दो लोगों के बैठने, हथियारों के प्रदर्शन, कार पर काली फिल्म और सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे ढकने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा, 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने और रैलियों पर भी रोक है।
जहां पाकिस्तानी सेना इन हमलों के पीछे दूसरे देशों का हाथ बता रही है, वहीं रिटायर्ड मेजर आदिल राजा जैसे आलोचकों का कहना है कि यह सरकार और सेना की अपनी अक्षमता को छिपाने की कोशिश है।