खामेनेई की धुर-विरोधी महिला की आखिरी गिनती शुरू; बीता हेममतील को फांसी पर चढ़ाने की तैयारी में तेहरान
Bita Hemmati Iran Execution: ईरान सरकार प्रदर्शनकारी बीता हेममती को फांसी देने की तैयारी में है। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और विस्फोटक रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
बीता हेममतील, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bita Hemmati Iran Execution News: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की गूंज एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। वहां की सरकार अब प्रदर्शनों में शामिल होने वाली पहली जानी-मानी महिला प्रदर्शनकारी, बीता हेममती को फांसी पर चढ़ाने की अंतिम तैयारी कर रही है। बीता हेममती को इस साल के शुरू में हुए ‘एंटी रिजीम प्रोटेस्ट’ के दौरान गिरफ्तार किया गया था और वह इस साल मौत की सजा पाने वाली पहली प्रमुख महिला चेहरा बन गई हैं।
क्या हैं बीता हेममती पर आरोप?
ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, बीता हेममती पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। विपक्षी गुट ‘नेशनल काउंसिल ऑफ रेसिस्टेंस’ (NCRI) द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, उन पर प्रदर्शनों के दौरान विस्फोटक और अवैध हथियारों का उपयोग करने का आरोप है। इसके अलावा, उन पर कंक्रीट ब्लॉक जैसी वस्तुओं को सुरक्षा बलों पर फेंकने, अवैध सभाओं का हिस्सा बनने और राष्ट्रीय सुरक्षा में गंभीर बाधा उत्पन्न करने के दोष मढ़े गए हैं।
पूरे परिवार पर टूटा न्याय का कहर
बीता हेममती के साथ-साथ उनके परिवार और करीबियों को भी इस कठोर सजा का सामना करना पड़ रहा है। उनके पति, मोहम्मदरेजा मजीद असल को भी इसी मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, उनके अपार्टमेंट में रहने वाले दो अन्य पड़ोसियों बेहरोज़ और कुरोश ज़मानिनेज़ाद को भी दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी गई है और उनकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं, हेममती के एक रिश्तेदार आमिर हेममती को सरकार विरोधी दुष्प्रचार के आरोप में छह साल की जेल की सजा सुनाई गई है।
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ईरान में बढ़ता फांसी का ग्राफ
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान में फांसी देने की दर में खतरनाक तेजी देखी गई है। अनुमान है कि 2025 के अंत तक ईरान में 1400 से अधिक लोगों को फांसी दी जा सकती है, जिनमें से अधिकांश प्रदर्शनकारी हैं। जनवरी में हुए व्यापक प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकारी एजेंसियों ने बल का प्रयोग किया था जिसके बाद बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं और त्वरित ट्रायल के माध्यम से मौत की सजाएं सुनाई गईं। ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि 2010 से 2024 के बीच ईरान में 125 महिलाओं को पहले ही फांसी दी जा चुकी है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया
वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने इन सजाओं की कड़ी निंदा की है। आरोप लगाया जा रहा है कि ईरान सरकार अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने और विपक्ष के भीतर डर का माहौल पैदा करने के लिए फांसी का हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसियों के अनुसार, ईरान इन प्रदर्शनकारियों पर ‘दुश्मन सरकारों’ के लिए काम करने का मनगढ़ंत आरोप लगाकर अपनी सत्ता पर पकड़ बनाए रखना चाहता है।
