पाकिस्तानी सेना ने खुलेआम किया कत्लेआम, 7 बलूचों को उतारा मौत के घाट! मानवाधिकार रिपोर्ट का चौंकाने वाला दावा

Baloch Killings: पाकिस्तानी सेना की बलूचों पर ज्यादती का एक और मामला सामने आया है। करीब सात बलूच नागरिकों को बिना किसी अदालती आदेश के कत्ल किए जाने का बड़ा आरोप मानवाधिकार संगठन ने लगाया है।
Balooch Killings
बलूच प्रदर्शन (सोर्स- आईएनएस)
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Human Rights Crisis in Balochistan: बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने अवारन जिले के दो भाइयों नादिल बलूच और शेर जान की बिना कानूनी कार्रवाई के हत्या की कड़ी निंदा की है। साथ ही आरोप है कि पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स ने उन्हें जबरदस्ती गायब कर दिया था। राइट्स बॉडी ने बताया कि नादिल का गोलियों से छलनी शव 8 मार्च को अवारन में जाहू के कोटू इलाके में फेंक दिया गया था।

पाकिस्तान पर आरोप है कि हत्या से लगभग चार महीने पहले तक उसे "गैर-कानूनी हिरासत" में रखा गया था। उसी दिन, शेर का क्षत-विक्षप्त शव बाद में अवारन के तीरतागे इलाके में मिला। उसे 21 नवंबर, 2025 को पाकिस्तानी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों ने हब चौकी मेन बाजार से जबरदस्ती गायब कर दिया था।

मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

गहरी चिंता जताते हुए 'पांक' ने कहा कि इन दोनों भाइयों की हत्या बलूचिस्तान में आम तौर पर बताई जाने वाली 'किल एंड डंप पॉलिसी' को दर्शाती है। जिसके तहत लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया जाता है, फिर लंबे समय तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के बाद उन्हें मार दिया जाता है। पांक ने आगे बताया कि 5 मार्च को पंजगुर जिले के परूम इलाके में डेथ स्क्वाड ने दो युवा ड्राइवरों को निशाना बनाकर मार डाला। मरने वालों की पहचान 20 साल के नियाज बलूच और 20 साल के जाकिर बलूच के तौर पर हुई।

स्वतंत्र जांच की मांग

'पांक' ने नियाज और जाकिर की हत्याओं की एक स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की। 'पांक' ने आगे बताया कि हलीम बलूच का क्षत-विक्षप्त शव 6 मार्च को पंजगुर के सरीकुरान इलाके में जबरदस्ती गायब किए जाने के बाद मिली थी। मानवाधिकार संस्था के मुताबिक, पंजगुर के खुदाबदन में रहने वाले और अपनी दुकान चलाने वाले हलीम को 20 फरवरी को पाकिस्तानी डेथ स्क्वॉड ने उनके घर से जबरदस्ती गायब कर दिया था।

हम्माल हसनी की हत्या पर बीवाईसी का आरोप

एक और मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी ने आरोप लगाया कि बलूच वकील हम्माल हसनी को 6 मार्च को पंजगुर के कोह सब्ज पलंतक इलाके में फ्रंटियर कॉर्प्स ने मार डाला। संगठन के मुताबिक यह ‘किल-एंड-डंप’ पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें नागरिकों को उठाकर बाद में उनका शव परिवार को सौंप दिया जाता है।

उमर जान की हत्या पर उठे सवाल

एक अन्य घटना में 19 वर्षीय ड्राइवर उमर जान को 5 मार्च को पंजगुर के परूम इलाके में गोली मार दी गई। बलूज यकजेहती कमेटी ने आरोप लगाया कि यह हमला पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने किया और कहा कि बढ़ती हत्याओं पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को हस्तक्षेप करना चाहिए।

एजेंसी इनपुट के साथ

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