अबू धाबी के BAPS मंदिर को मिला ‘Global Tolerance Award 2026’, वैश्विक सर्वोच्च सम्मान से वैश्विक स्तर पर पहचान
BAPS Hindu Mandir: अबू धाबी के इस भव्य मंदिर को विश्व शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित Global Tolerance Award 2026 से सम्मानित किया गया है। यह वैश्विक एकता का एक महान प्रतीक बन गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
बीएपीएस हिंदू मंदिर अबू धाबी (सोर्स-सोशल मीडिया)
BAPS Hindu Mandir Receives Global Tolerance Award 2026: ग्लोबल अवार्ड से अबू धाबी के इस भव्य मंदिर को एक बहुत ही ऐतिहासिक पहचान मिली है। विश्व में शांति और मानवीय एकता का संदेश फैलाने वाले इस मंदिर को ‘टॉलरेंस अवॉर्ड 2026’ दिया गया है। यह सम्मान इंटरनेशनल डायलॉग ऑफ सिविलाइजेशन एंड टॉलरेंस कॉन्फ्रेंस में विश्व पटल पर प्रदान किया गया। यह पुरस्कार सहिष्णुता, संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को वैश्विक रूप से बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को मिलता है।
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार केवल एक संस्था का सम्मान नहीं है, बल्कि उन मानवीय मूल्यों की सच्ची स्वीकृति है। इस संस्था ने समाज में मानवता, करुणा, एकता और पारस्परिक सम्मान को बहुत ही मजबूती से हमेशा स्थापित किया है। मंदिर ने विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एक मंच पर लाकर विश्व-बंधुत्व का एक बहुत ही अद्भुत उदाहरण दिया है। यह सम्मान सभी मानवीय सहायता अभियानों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का एक बेहद खूबसूरत और शानदार परिणाम है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंसान
पुरस्कार ग्रहण करते हुए मंदिर के प्रमुख पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी ने बहुत ही प्रेरणादायी और सुंदर विचार रखे। उन्होंने परिवार, आध्यात्मिकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य पर सभी लोगों का ध्यान बहुत गहराई से आकर्षित किया। स्वामी जी ने कहा कि आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि AI या मशीनें हमारे लिए क्या कर सकती हैं। बल्कि मुख्य सवाल यह है कि AI के प्रभाव से हम किस प्रकार के मनुष्य और समाज का निर्माण कर रहे हैं।
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उन्होंने भारतीय संस्कृति के शाश्वत आदर्शों ‘मातृदेवो भव’, ‘पितृदेवो भव’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का बहुत सुंदर उल्लेख किया। उनका मानना है कि एक मजबूत परिवार ही एक मजबूत समाज और समृद्ध राष्ट्र का बहुत ही ठोस आधार होता है। परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज द्वारा प्रेरित ‘घर सभा’ की महान परंपरा को उन्होंने आधुनिक युग की जरूरत बताया। इस परंपरा में परिवार प्रतिदिन कुछ समय साथ बैठकर प्रार्थना, सार्थक संवाद और गहरी आत्मीयता का अनुभव करता है।
AI सशक्त परिवार की जरूरत
अपने उद्बोधन के समापन पर स्वामी जी ने एक अत्यंत प्रेरक और बहुत ही सकारात्मक संदेश पूरी दुनिया को दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य केवल अधिक बुद्धिमान मशीनों से नहीं बनेगा बल्कि वह अधिक सशक्त परिवारों से निर्मित होगा। इसके लिए अधिक संवेदनशील हृदयों और अधिक करुणामय समुदायों की बहुत ज्यादा आवश्यकता इस आधुनिक समाज को होगी। हमें केवल AI निर्भर परिवार नहीं चाहिए, बल्कि ऐसे AI सशक्त परिवार चाहिए जो मानवीय भावनाओं से भी गहराई से जुड़े हों।
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यह ऐतिहासिक सम्मान मंदिर की उस वैश्विक और बहुत महत्वपूर्ण भूमिका का एक बहुत ही सच्चा और सुंदर प्रतीक है। इसके माध्यम से यह भव्य मंदिर विभिन्न संस्कृतियों, समुदायों और देशों को आपस में प्यार और शांति से जोड़ रहा है। यह पूरे विश्व में शांति, आपसी संवाद और मानव एकता की एक बहुत ही नई और सकारात्मक प्रेरणा बन रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि जहां विविधता का पूरा सम्मान होता है, वहीं सच्ची और स्थायी एकता का उदय होता है।
