चंद्रपुर में 1381 छात्रों ने बनाया विश्व का सबसे बड़ा पीस सिंबल, 'हमें युद्ध नहीं शांति चाहिए' का गूंजा संदेश

Chandrapur Youth Power News: सोमय्या ग्रुप के 1381 छात्रों ने 'विश्व शांति चिन्ह' की मानव श्रृंखला बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा एक ही महीने में यह दूसरा बड़ा रिकॉर्ड है।
Somayya Group in Chandrapur broke the Guinness World Record as 1381 students formed a 'World Peace Symbol' human chain. This marks the institution's second world record in one month.
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड छात्रों ने 'विश्व शांति चिन्ह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chandrapur Guinness World Record: चंद्रपुर स्थित सोमय्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स ने शनिवार (28 मार्च) सुबह 10 बजे 1381 विद्यार्थियों की मानव श्रृंखला बनाकर 'विश्व शांति चिन्ह' तैयार किया और एक ही महीने में दूसरी बार विश्व रिकॉर्ड कायम किया इस अनूठे प्रयास को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस अवसर पर विधायक सुधीर मुनगंटीवार, संस्था के अध्यक्ष पांडूरंग आंबटकर, पियूष आंबटकर, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक स्वप्निल डोंगरीकर और समन्वयक मिलिंद वारलेकर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस उपलब्धि की पूरे जिले में चर्चा हो रही है।

युद्ध नहीं शांति जरुरी

दुनिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव- के बीच चंद्रपुर से शांति का एक मजबूत संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से विश्व शांति का प्रतीक बनाकर मानवता और एकता का संदेश दिया।

इससे पहले दक्षिण भारत में 1070 बच्चों द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड था, जिसे सोमय्या ग्रुप के 1381 विद्यार्थियों ने तोड़ दिया। इस उपलब्धि पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से संस्था के संचालकों पांडुरंग आंबटकर और पियूष आंबटकर को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

लावणी नृत्य का भी बनाया विश्व रिकॉर्ड

गौरतलब है कि इसी महीने 1 मार्च को इस संस्था ने 2700 महिलाओं द्वारा लावणी नृत्य प्रस्तुत कर एक और विश्व रिकॉर्ड बनाया था। चंद्रपुर के वडगांव स्थित सोमय्या परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रसारण गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से 180 देशों में किया गया इस उपलब्धि के साथ ही चंद्रपुर के नाम एक और विश्व रिकॉर्ड जुड़ गया है।

दुनिया में बढ़ती अस्थिरता, युद्ध का खतरा और निर्दोष लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए युद्ध नहीं, शांति चाहिए" का संदेश देना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से सोमय्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स ने यह ऐतिहासिक पहल की। यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मानवता और शांति का सशक्त संदेश है। (पांडुरंग आंबटकर, अध्यक्ष, सोमय्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, चंद्रपुर)

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