चुनाव से पहले विद्रोह…बांग्लादेश को सुलगाने के पीछे की कहानी, 10 प्वाइंट्स में सभी सवालों के जवाब
Bangladesh Election Violence: बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में हिंसा, मीडिया ऑफिस पर हमले और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर तनाव। 10 प्वाइंट्स में समझें पूरी बात।
- Written By: अर्पित शुक्ला
चुनाव से पहले विद्रोह...बांग्लादेश को सुलगाने के पीछे की कहानी, 10 प्वाइंट्स में सभी सवालों के जवाब
Bangladesh Violence News: बांग्लादेश एक बार फिर सियासी हिंसा और सड़क पर उतरे गुस्से के दौर से गुजर रहा है। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत ने देश के कई शहरों में हंगामा मचा दिया है। चुनाव से ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि अंतरिम सरकार, मीडिया की सुरक्षा और भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर भी नई चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। अमेरिका ने पहले ही इस संदर्भ में अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी कर दिया था। आइए जानें अब तक के टॉप 10 अपडेट्स।
उस्मान हादी कौन थे?
शरीफ उस्मान हादी इंकिलाब मंचो मंच के प्रवक्ता और आम चुनाव के उम्मीदवार थे। पिछले शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर रिक्शा से जाते वक्त बाइक सवार नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी।
उस्मान हादी की मौत कब हुई?
हादी को पहले ढाका के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में हालत गंभीर होने पर उन्हें सिंगापुर ले जाया गया। करीब एक हफ्ते तक लाइफ सपोर्ट पर रहने के बाद गुरुवार शाम उनकी मौत हो गई।
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बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
जैसे ही हादी की मौत की खबर बांग्लादेश में पहुंची, ढाका में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। शाहबाग चौराहे और ढाका यूनिवर्सिटी के आसपास जोरदार प्रदर्शन हुए। बांग्लादेश के नौफेल इलाके में एक पूर्व मंत्री के आवास में आगजनी की घटना सामने आई है। आगजनी के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
मीडिया के ऑफिस क्यों फूंके गए?
गुस्साई भीड़ ने बांग्लादेश के सबसे बड़े बंगाली अखबार प्रोथोम आलो और अंग्रेजी अखबार डेली स्टार के दफ्तरों में घुसकर तोड़फोड़ की। डेली स्टार के ऑफिस में आग भी लगा दी गई। ये प्रदर्शनकारी मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि वे भारत समर्थक हैं।
मीडिया ऑफिस में आग लगाने के बाद क्या हुआ?
डेली स्टार के दफ्तर में आग लगने के दौरान कई पत्रकार और कर्मचारी अंदर फंस गए थे। एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया था। बाद में सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आगजनी के बाद सुबह देखा गया कि पूरा दफ्तर जलकर राख हो चुका था।
क्या सिर्फ ढाका में हुई हिंसा?
हिंसा सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं रही। चटगांव, राजशाही और अन्य शहरों से भी झड़प और आगजनी की खबरें आईं। चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के बाहर विरोध और हमले हुए।
उस्मान हादी के हमलावरों का क्या हुआ?
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा कि हमले के आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी भारत भागने की आशंका जताई जा रही है। इस बयान के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया। जुलाई ओइक्या नाम के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च की कोशिश की और भारत विरोधी नारे लगाए।
भारत के खिलाफ भी हुए प्रदर्शन?
हादी की मौत से पहले भी भारत विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे। बांग्लादेश में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ने दो वीजा आवेदन केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी के हवाले से एएनआई ने बताया कि खुलना और राजशाही में स्थित केंद्र सुरक्षा कारणों से बंद किए गए हैं। राजशाही में ‘जुलाई 36 मंचा’ के बैनर तले भारतीय सहायक उच्चायोग की ओर मार्च आयोजित किया गया था, जो स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 12.30 बजे भद्र मोड़ से शुरू हुआ था। इस मार्च के चलते सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया था।
प्रदर्शन के बाद भारत ने क्या किया?
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब कर बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने खास तौर पर चरमपंथी तत्वों की उन योजनाओं पर चिंता जताई, जिनसे ढाका में भारतीय मिशन की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरिम सरकार से उम्मीद है कि वह अपने कूटनीतिक दायित्वों के तहत भारतीय मिशनों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। सूत्रों के मुताबिक, दूत को तलब किए जाने की एक वजह नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्लाह का हालिया विवादित भाषण था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश की ओर से भारत से अलगाववादी ताकतों को पनाह देने और देश के सात पूर्वोत्तर राज्यों को अलग करने जैसे दावे किए थे।
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प्रदर्शन पर मोहम्मद यूनुस का क्या कहना था?
नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हादी की मौत को लोकतंत्र के लिए बड़ी क्षति बताया। यूनुस ने शांति की अपील की और पारदर्शी जांच का भरोसा दिया। बांग्लादेश में 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव होने हैं। ऐसे में हिंसा, भारत विरोधी माहौल, मीडिया पर हमले और राजनीतिक तनाव ने निष्पक्ष चुनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
