अधूरी रह जाएगी यूनुस की ख्वाहिश! चुनाव आयोग ने खोला मोर्चा, बोले- बात नहीं मानी तो करेंगे सख्त कार्रवाई
Referendum In Bangladesh: बांग्लादेश में चुनाव आयोग ने 12 फरवरी के जनमत संग्रह पर सरकार के प्रचार पर रोक लगा दी। यूनुस सरकार संविधान सुधार के पक्ष में है, बीएनपी और अन्य विपक्षी इसे विरोध कर रहे हैं।
- Written By: अक्षय साहू
मुहम्मद यूनुस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Election Commission Warns Muhammad Yunus: बांग्लादेश में चुनाव आयोग ने अब यूनुस सरकार के खिलाफ कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसका कारण है 12 फरवरी को चुनाव के साथ आयोजित होने वाला जनमत संग्रह। आयोग ने सरकार के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने जनमत संग्रह का प्रचार किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस निर्देश ने सरकार को बड़ा झटका दिया है।
दरअसल, बांग्लादेश की सरकार पहले ही आधिकारिक रूप से जनमत संग्रह के पक्ष में प्रचार करने की योजना बना चुकी थी। सरकार का कहना था कि वह आम जनता को इसके महत्व के बारे में जागरूक करेगी, ताकि बांग्लादेश के संविधान में कुछ स्थायी बदलाव किए जा सकें।
क्यों जनमत संग्रह करवाना चाहते थे यूनुस?
अंतरिम सरकार ने चुनाव के साथ संविधान में स्थायी बदलाव के लिए जनमत संग्रह कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत यदि 50 प्रतिशत से अधिक जनता इस जनमत संग्रह के पक्ष में वोट देती है, तो जुलाई चार्टर का नियम बांग्लादेश में लागू हो जाएगा। शेख हसीना को हटाने के बाद यूनुस सरकार लोकतांत्रिक सुधार लागू करने की कोशिश कर रही है।
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जुलाई चार्टर में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके अनुसार कोई व्यक्ति दो बार से अधिक प्रधानमंत्री नहीं बन सकता और पार्टी अध्यक्ष प्रधानमंत्री का पद नहीं संभाल सकता। कुल 37 बदलावों का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि जनमत संग्रह के बाद इसे संसद में बदला नहीं जा सकता, इसी वजह से वह प्रचार करना चाहती है।
क्या है पूरा विवाद?
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार, जमात ए इस्लामी और नाहिद इस्लाम की पार्टी जनमत संग्रह के पक्ष में हैं, जबकि तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी और जातीय पार्टी इसका विरोध कर रही हैं। यदि सरकार इसके पक्ष में प्रचार करती है तो इसका नुकसान सीधे बीएनपी को हो सकता है।
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चुनाव पर यह कदम असर डाल सकता है, इसलिए चुनाव आयोग ने रोक लगा दी। स्थानीय मीडिया “समकाल” ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि, आयोग के फैसले के बाद सरकार के अधिकारी हतप्रभ हैं और सरकार के शीर्ष नेतृत्व में असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।
