ढाका में भारी तनाव… कई लोगों की मौत, सरकार बोली- हसीना के बयान दिखाए तो कार्रवाई होगी
Bangladesh Sheikh Hasina Verdict: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सभी मीडिया संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी बयान का प्रसारण या प्रकाशन न करें।
- Written By: अमन उपाध्याय
हसीना के बयान पर लगी रोक, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ कथित अपराधों में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच अंतरिम सरकार ने मीडिया संस्थानों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे शेख हसीना के किसी भी प्रकार के बयान को प्रकाशित या प्रसारित न करें।
सोमवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी (NCSA) ने चेतावनी दी कि हसीना के बयानों में ऐसे संदेश या अपीलें हो सकती हैं जो देश में हिंसा, अव्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों को उकसा सकती हैं। एजेंसी के अनुसार, यह सामग्री सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
अदालत ने दोषी करार दिया
रिपोर्ट के अनुसार, NCSA ने मीडिया से अपील की कि वे “राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जिम्मेदार पत्रकारिता” का पालन करें। विज्ञप्ति में कहा गया कि कुछ मीडिया संस्थान उन व्यक्तियों के बयान प्रकाशित कर रहे हैं जिन्हें अदालत ने दोषी करार दिया है और जो वर्तमान में फरार हैं। ऐसा करना साइबर सिक्योरिटी ऑर्डिनेंस का उल्लंघन माना जाएगा, और प्रशासन ऐसे किसी भी कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने का अधिकार रखता है।
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एजेंसी ने आगे यह भी कहा कि किसी नकली पहचान का उपयोग कर या सिस्टम में अवैध तरीके से प्रवेश कर हिंसा भड़काने, जातीय घृणा फैलाने या उकसाने वाले संदेश प्रसारित करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दो साल की जेल या दस लाख टका तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
हिंसा और मौतों के लिए जिम्मेदार
78 वर्षीय शेख हसीना को ICT ने पिछले वर्ष छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। यह फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया जबकि वे 5 अगस्त को हिंसा के बीच देश छोड़कर भारत चली गई थीं। अदालत पहले ही उन्हें फरार घोषित कर चुका है। हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा दी गई है।
मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह साबित करता है कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है।” वहीं, शेख हसीना ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध और फर्जी ट्रिब्यूनल का फैसला” बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला एक ऐसी सरकार ने दिया है जिसे जनता ने नहीं चुना।
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फिलहाल ढाका और अन्य शहरों में तनाव बना हुआ है। सोमवार को हसीना समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम दो लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है।
